खुदरा महंगाई में उछाल के बावजूद लगातार चौथे महीने खुदरा महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निचली सहनशील सीमा (2%) से नीचे बनी हुई है। मौजूदा स्तर पर महंगाई दर अभी भी नियंत्रण में मानी जा रही है।
नवंबर में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर 4.8 प्रतिशत बढ़ा, यह आंकड़ा बाजार के 5 प्रतिशत के अनुमान से नीचे रहा। उपभोक्ता खर्च का अहम पैमाना मानी जाने वाली रिटेल सेल्स (खुदरा बिक्री) नवंबर में केवल 1.3 प्रतिशत बढ़ी।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और प्रकाश मुद्रास्फीति नवंबर में 2.32% रही, जो अक्टूबर के 1.98% से अधिक है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के निर्देश के में कहा गया है कि 10 ग्राम या उससे छोटे पैक पर भी रिटेल सेल प्राइस और सभी अनिवार्य डिक्लेरेशन स्पष्ट रूप से प्रिंट करने होंगे।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाली खाने-पीने की चीजों की कीमतें सितंबर के -2.28% की तुलना में घटकर -5.02% रह गईं।
विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई में यह बड़ी गिरावट RBI को भविष्य में नीतिगत दरों पर नरम रुख अपनाने के लिए अधिक गुंजाइश प्रदान कर सकती है।
भारत की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में आठ साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। बावजूद, खाद्य पदार्थों और मुख्य वस्तुओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी की वजह से, अगस्त में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति में तेजी देखी गई।
अमेरिका में इस साल के अंत तक, खाद्य कीमतों में 3.4% की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 20 साल के ऐतिहासिक औसत 2.9% से भी ज्यादा है।
मई 2025 की तुलना में जून 2025 की मुख्य मुद्रास्फीति में 72 बेसिस पॉइंट्स (0.72 प्रतिशत) की गिरावट आई है। ये जनवरी 2019 के बाद साल-दर-साल सबसे कम मुद्रास्फीति है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों में बताया गया है कि मई में खाद्य मुद्रास्फीति 0.99 प्रतिशत थी, जो एक साल पहले इसी महीने में 8.69 प्रतिशत से काफी कम है।
रिजर्व बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी 1 प्रतिशत की बड़ी कटौती की है।
अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर लगभग 6 साल के निचले स्तर 3.16 प्रतिशत पर आ गई, जिसका मुख्य कारण सब्जियों, फलों, दालों और अन्य प्रोटीन युक्त वस्तुओं की कीमतों में नरमी है, और यह रिजर्व बैंक के आरामदायक दायरे में बनी हुई है।
सरकार की तरफ से ताजा आंकड़ों में कहा गया है कि खुदरा महंगाई जनवरी के मुकाबले फरवरी में घटी। फरवरी में आई यह गिरावट चालू वित्तीय वर्ष में सिर्फ तीसरी बार है जब महंगाई की दर 4 प्रतिशत से नीचे आई है।
भारत में खुदरा बाजार 2024 में 82 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह 2014 में 35 लाख करोड़ रुपये का था। पिछले दशक के दौरान देश का खुदरा क्षेत्र सालाना 8.9 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।
साल के पहले महीने में महंगाई में आम लोगों को राहत मिली है। ग्रामीण मुद्रास्फीति दिसंबर में 5.76 प्रतिशत की तुलना में घटकर 4.64 प्रतिशत रह गई।
सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर में घटकर चार महीने के निचले स्तर 5.22 प्रतिशत पर आ गई, जबकि नवंबर में यह 5.48 प्रतिशत थी।
लखनऊ के लुलु मॉल के महाप्रबंधक समीर वर्मा ने कहा कि प्रमुख शहरों में मॉल लीजिंग गतिविधि में लगातार वृद्धि खुदरा क्षेत्र की मजबूत रिकवरी और विस्तार को बताता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े बताते हैं कि कि फूड बास्केट में मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 9. 24 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 5. 66 प्रतिशत थी। एक साल पहले महीने में 6. 62 प्रतिशत थी।
कृषि श्रमिकों (सीपीआई-एएल) और ग्रामीण मजदूरों (सीपीआई-आरएल) के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अगस्त 2024 में 7-7 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
अगस्त, 2024 में लगातार दूसरे महीने खुदरा महंगाई दर काबू में रही। अगस्त में खुदरा महंगाई दर 3.65 फीसदी रही।
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