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UP: शिक्षा मंत्री के भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से दिया इस्तीफा, कांग्रेस ने मंत्री से भी त्यागपत्र मांगा

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : May 26, 2021 04:43 pm IST,  Updated : May 26, 2021 04:43 pm IST

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया है।

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UP: शिक्षा मंत्री के भाई ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद से दिया इस्तीफा, कांग्रेस ने मंत्री से भी त्यागपत्र मांगा Image Source : FILE

लखनऊ/सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ सतीश द्विवेदी के भाई डॉ अरुण द्विवेदी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद से इस्तीफा दे दिया है। यूनिवर्सिटी के कुलपति ने इसकी पुष्टि की है। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री के भाई की गरीब कोटे से नियुक्ति की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजभवन ने मामले का संज्ञान लिया था। चर्चा थी कि शिक्षा मंत्री ने भाई की ईडब्लूएस कोटे से नियुक्ति अपने रसूख के बल पर करवाई थी।

इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरा है और बेसिक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने ट्वीट में लिखा, "बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई के इस्तीफ़े से सरकार की जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती। 2019 के EWS प्रमाण पत्र पर 2021 में कैसे नियुक्ति हुई जबकि EWS प्रमाण पत्र एक साल के लिए वैध होता है। दोषियों पर कड़ी कार्यवाई हो। बेसिक शिक्षा मंत्री नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दें।"

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के मुताबिक, मंत्री के भाई की नियुक्ति गरीब कोटे से हुई है। पोस्ट पर लोगों ने जमकर चुटकी ली और नियुक्ति पर सवाल भी उठाए। विपक्ष ने भी इस मामले पर राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा मंत्री को आड़े हाथ लिया। ऐसे में बुधवार को अरुण द्विवेदी ने सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से इस्तीफा तो दे दिया लेकिन कांग्रेस ने बेसिक शिक्षा मंत्री के भी इस्तीफे की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, अरुण द्विवेदी का ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र 2019 में जारी हुआ था, जिसके आधार पर उन्हें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में 2021 में नौकरी मिली जबकि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र एक साल के लिए ही मान्य होता है। इस संबंध में डीएम दीपक मीणा ने बताया कि 2019-20 के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जारी किया गया था, जो मार्च 2020 तक मान्य था।

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