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फ्रेट कॉरिडोर में 8 साल की देरी से 11 गुना बढ़ी लागत: पीएम मोदी

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Dec 29, 2020 12:44 pm IST, Updated : Dec 29, 2020 12:44 pm IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों की कार्य संस्कृति की वजह से फ्रेट कॉरिडोर का काम लटका और इसकी लागत 11 गुना बढ़ गई। 

फ्रेट कॉरिडोर में 8 साल की देरी से 11 गुना बढ़ी लागत: पीएम मोदी- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV फ्रेट कॉरिडोर में 8 साल की देरी से 11 गुना बढ़ी लागत: पीएम मोदी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों की कार्य संस्कृति की वजह से फ्रेट कॉरिडोर का काम लटका और इसकी लागत 11 गुना बढ़ गई। पीएम मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर(EDFC) के ‘न्यू भाऊपुर- न्यू खुर्जा सेक्शन’ और प्रयागराज में EDFC के परिचालन नियंत्रण केन्द्र(OCC) का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। 

पीएम मोदी ने इस फ्रेट कॉरिडोर के फायदे गिनाए और कि जब इस प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर से देश को इतना फायदा हो रहा है तो सवाल उठता है कि देरी क्यों हुई, यह प्रोजेक्ट 2014 से पहले जो सरकार थी उसकी कार्य संस्कृति की जीता जागता प्रमाण है, 2006 में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और उसके बाद यह सिर्फ कागजों और फाइलों में ही बनता रहा, केंद्र को राज्यों के साथ जिस गंभीरता से बात करनी चाहिए थी वह किया ही नहीं गया। नतीजा हुआ कि काम अटक गया लटक गया और भटक गया, 2014 तक एक किलोमीटर ट्रैक भी नहीं बिछाया गया। जो पैसा स्वीकृत हुआ था वह सही तरीके से खर्च नहीं हो पाया, 2014 में सरकार बनने के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए फिर से फाइलों को खंगाला गया, अधिकारियों को नए सिरे से आगे बढ़ने के लिए कहा गया तो बजट करीब 11 गुना यानि 45000 करोड़ से ज्यादा बढ़ गया। 

केंद्र ने राज्यों से भी संपर्क बढ़ाया, उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित किया और नई टेक्नोलॉजी लाए, इसी का परिणाम है कि करीब 1100 किलोमीटर का काम अगले कुछ महीनों में पूरा होने वाला है, 8 साल में एक भी किलोमीटर नहीं और 6-7 साल में 1100 किलोमीटर!

इंफ्रा में राजनीतिक उदासीनता का नुकासन सिर्फ फ्रेट कॉरिडोर को ही नहीं उठाना पड़ा है, पूरा रेलवे सिस्टम इसका बहुत बड़ा भुक्त भोकी रहा है। पहले फोकस ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का होता था ताकि चुनाव में लाभ मिल सके लेकिन जिन पटरियों पर रेल चलाना था उनपर निवेश ही नहीं होता था। हमारी ट्रेनेों की स्पीड बहुत कम थी और पूरा नेटवर्क जानलेवा मानव रहित फाटकों से भरा पड़ा  था। हमने 2014 के बाद इस कार्यशैली को बदला और अलग से रेल बजट की व्यवस्ता को खत्म करते हुए भूल जाने वाली राजनीति को बदला, रेल ट्रैक पर निवेश किया और रेलवे नेटवर्क को मानव रहित फाटकों से मुक्त किया, रेलवे ट्रैक को तेज गति से चलने वाली ट्रेनों के लिए तैयार किया, रेलवे के बिजली करण और चौड़ीकरण पर फोकस किया। आज बंदे भारत जैसी सेमी हाईस्पीड ट्रेन चल रही है और भारतीय रेल पहले से अधिक सुरक्षित हुई है।

पीएम मोदी ने कहा-'बीते सालों में रेलवे में हर स्तर पर सुधार किए गए हैं, स्वच्छता हो बेहतर खाना पीना हो या फिर दूसरी सुविधाएं, फर्क आज साफ नजर आता है। इसी तरह रेलवे से जुड़ी मैन्य फैक्चरिंग में भारत ने आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांग लगाई है। भारत आधुनिक ट्रेनों का निर्माण अपने लिए तो कर रहा है साथ में निर्यात भी कर रहा है। यूपी की ही बात करें तो वाराणसी स्थित लोकोमोटिव संस्थान भारत में इलेक्ट्रिक इंजन बनाने वाला बड़ा सेंटर बन रहा है, राय बरेली की मॉड्रन की कोच फैक्ट्री को भी 6 सालों मे डेंटिंग पेंटिंग की भूमिका से बाहर निकालकर लाए हैं, वहां अबतक 5000 से ज्यादा रेलवे कोच बन चुके हैं और विदेशों को भी निर्यात किए जा रहे हैं।' 

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