Tuesday, March 10, 2026
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Sheetala Ashtami (Basoda Puja) 2026 Date And Time: शीतला अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा? नोट कर लें बसोड़ा पूजा की सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Mar 10, 2026 07:31 am IST, Updated : Mar 10, 2026 07:36 am IST

Sheetala Ashtami (Basoda Puja) 2026 Date And Time: शीतला अष्टमी यानी बसोड़ा पूजा का पावन त्योहार चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है। जानिए इस साल ये त्योहार कब मनाया जाएगा और इसकी पूजा विधि क्या है।

sheetala ashtami puja vidhi- India TV Hindi
Image Source : CANVA शीतला अष्टमी पूजा विधि और मुहूर्त

Sheetala Ashtami (Basoda Puja) 2026 Date And Time: शीतला अष्टमी को बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देवी शीतला की पूजा की जाती है जिन्हें शीतलता प्रदान करने वाली और रोगों से बचाव करने वाले देवी के रूप में पूजा जाता है। शीतला अष्टमी यानी बसोड़ा पर्व पर शीतला माता की पूजा करने से खासतौर से गर्मियों के मौसम में होने वाली बीमारियों से राहत मिल जाती है। इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है। चलिए आपको बताते हैं शीतला अष्टमी की तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि।

शीतला अष्टमी 2026 डेट और टाइम (Sheetala Ashtami 2026 Date And Time)

शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026, बुधवार
शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त 06:36 AM से 06:27 PM
अष्टमी तिथि प्रारम्भ 11 मार्च 2026 को 01:54 AM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त 12 मार्च 2026 को 04:19 AM बजे

शीतला अष्टमी पूजा विधि (Sheetala Ashtami Puja Vidhi)

  • शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करें। 
  • इसके बाद किसी नदी या सरोवर के किनारे जाकर शीतला माता की मूर्ति स्‍थापित करें। अगर ये संभव नहीं तो घर पर भी आप ऐसा कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि शीतला माता की प्रतिमा के साथ ठंडे पानी का कलश जरूर रखना है।
  • देवी की प्रतिमा का श्रृंगार करें और माता को लाल रंग के वस्‍त्र अर्पित करें।
  • इसके बाद शीतला अष्‍टकम का पाठ करें।
  • इस पूजा में सोलह प्रकार की चीजें चढ़ाएं जाने की विशेष परंपरा है। 
  • शीतला माता शीतलता का प्रतीक हैं इसलिए इस दिन घर में कहीं भी आग नहीं जलाई जाती है। यही कारण है इस दिन चूल्हा तक नहीं जलाया जाता है। लोग पूरे दिन एक दिन पहले बने बासी भोजन का सेवन करते हैं। 
  • शीतला अष्टमी का भोजन एक दिन पहले ही पका लिया जाता है। 
  • माता शीतला को इस दिन बासी भोजन का ही भोग लगता है। 
  • कई जगह पर इस दिन दीपक भी नहीं जलाया जाता है। 
  • शीतला माता की पूजा के समय उनकी व्रत कथा जरूर पढ़ें। अंत में उनकी आरती उतारें।
  • बासी भोजन का भोग लगाएं और खुद भी इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

शीतला अष्टमी का भोग (Sheetala Ashtami Ka Bhog)

शीतला अष्टमी के भोग में दही, पुए और मीठे चावल जरूर होने चाहिए। इसके अलावा आप अपनी श्रद्धानुसार नमक पारे, रोटी, शक्कर की रोटी, बाजरा, फीकी पूड़ी और पकौड़ियां भी भोग स्वरूप रख सकते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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