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Exclusive : इंडिया टीवी पर ताहिर हुसैन ने माना, 24 फरवरी को घर की छत पर थे मौजूद

 Edited By: Kumar Sonu @Sonu_indiatv
 Published : Feb 27, 2020 02:34 pm IST,  Updated : Feb 27, 2020 03:18 pm IST

दिल्ली दंगों के मास्टरमांइंड कहे जा रहे आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन ने आज इंडिया टीवी से कहा मुझे इस पूरे घटनाक्रम का मोहरा बनाया जा रहा है।

दिल्ली दंगों के मास्टरमांइंड कहे जा रहे आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन ने आज इंडिया टीवी से कहा मुझे इस पूरे घटनाक्रम में मोहरा बनाया जा रहा है। भीड़ दरवाजा तोड़कर मेरे घर में घुसी और छत पर जाकर पथराव किया। उन्होंने दंगों में किसी भी तरह से शामिल होने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि भीड़ से मेरे घर और परिवार को खतरा था।  जिस तरह से भीड़ अंदर घुसी मैं डंडे से उस भीड़ को मारकर वापस भेज भी रहा था, वीडियो में कई लड़के वहां से भागते हुए भी दिख रहे हैं। मैं बार बार अंदर बाहर जा रहा था और देख रहा था कि कोई और आदमी तो नहीं चढ़ जाए।  

इंडिया टीवी ने जब ताहिर हुसैन से पूछा कि वीडियो में एक व्यक्ति को आपका भाई बताया जा रहा है, क्या वह आपका भाई है? इस पर ताहिर ने कहा जी नहीं वह मेरा भाई नहीं है। इस दौरान ताहिर ने कई वीडियो भी दिखाए और दावा किया कि ये वीडियो उनकी बेगुनाही का सबूत हैं। ताहिर ने कहा कि इस वक्त मैं बहुत ज्यादा तकलीफ में हूं, मेरे ऊपर जो आरोप लग रहा है वह निराधार है, इसकी वजह से मेरी छवि खराब हुई है और इसकी वजह मेरी और अपने परिवार की जान का खतरा है। 

जब इंडिया टीवी ने पूछा कि दंगाई ही उनके घर में क्यों घुसे, उनको डर क्यों नहीं था। इस पर ताहिर ने कहा कि उनकी बिल्डिंग ही उस क्षेत्र में सबसे ऊंची है, इसलिए वहां पर लोग चढ़े और उन्होंने उनको रोकने का प्रयास किया और पुलिस को सूचित किया।  3 बजे के करीब मेरे गेट पर भीड़ ने गेट को पीटना शुरू किया, मैने अपने वर्कर्स को गेट पर खड़ा कर दिया, लेकिन इसके बावजूद भीड़ ने गेट तोड़ दिया और ऊपर चढ़ आए। यह मालूम नहीं पड़ रहा था कि कौन लोग हैं और कहां से आए हैं। ताहिर ने आगे बताया कि मेरा मेन गेट टूटा हुआ था, लेकिन पुलिस जब पहुंची तो तबतक हमने गेट को वेल्डिंग कराकर दोबारा मजबूत किया। क्योंकि मेरे यहां वेल्डिंग और लोहा लकड़ी का ही काम होता है। साइड के शटर को पुलिस वालों ने खोला था क्योंकि वे टॉयलट का इस्तेमाल कर रहे थे, और छत पर जाकर सुरक्षा की स्थिति को भी देख रहे थे। 

इंडिया टीवी ने पूछा कि जिसकी जान को खतरा रहेगा वो फोन पर बात करते हुए क्यों टहलेगा? इस पर ताहिर ने कहा जितना मैं कंट्रोल कर सकता था, मैंने किया, उस डंडे से लोगों को रोका और आग को भी रोकने की कोशिश की और फोर्स का इंतजार किया, लेकिन फोर्स नहीं आई, परिवार ने जब कहा कि अभी यहां फोर्स नहीं आ रही है और अपने परिवार को लेकर अंदर बंद हो जाओ कहीं ऐसा न हो कि आप लोगों की भी जान चली जाए। इसी बात की मैं बार बार जानकारी दे रहा हूं। कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति अपनी बिल्डिंग का इस्तेमाल इस घटिया काम के लिए कैसे होने देगा। 

ताहिर हुसैन ने कहा कि 23 को भारत बंद का ऐलान हुआ था, 23 को भी वहां पत्थरबाजी हुई थी लेकिन पुलिस ने कंट्रोल कर लिया था कोई बड़ी घटना नहीं हुई। 24 को स्थानीय एसएचओ के साथ हमने पैदल मार्च किया था और लोगों से शांति की अपील की थी। यह लगभग 12 बजे की घटना थी। इसके बाद मैं अपने घर चला गया। 2 बजे पत्थरबाजी शुरू हुई तो मैंने दिल्ली पुलिस को 100 नंबर पर फोन किया लेकिन कॉल कनेक्ट नहीं हुई, मैंने एसीपी साहब को फोन किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया, मैने लगभग 6 बार 100 नंबर पर फोन किया। 

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