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जंग के मैदान में सिख रेजीमेंट की बहादुरी से दुश्‍मन भी खौफ खाता है

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 25, 2016 04:09 pm IST,  Updated : Jan 26, 2016 02:55 pm IST

नई दिल्ली: जब कभी भी युद्ध हुआ है तो भारत की सिख रेजीमेंट ने उस युद्ध का करारा जवाब दिया हैं और भारतीय सेना का मान बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दिया है। सिख रेजीमेंट

sikh regiment
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1999 में कारगिल युद्ध के बाद टाइगर हिल पर कब्जा किया था
सिख सेना ने रॉयल ब्रिटिश आर्मी के साथ मिलकर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। इस रेजीमेंट ने 1999 में कारगिल युद्ध के बाद टाइगर हिल पर कब्जा किया था। सिख रेजीमेंट का आह्वाहन मुश्किल मिशन  के लिए किया जाता है। 8 वीं सिख बटालियन के सिपाहियों रश्विंदर सिंह, सुखविंदर सिंह और जसविंदर ने पहाड़ी के आसपास के कुंजी ऊंचाइयों को सुरक्षित किया था।  और दुश्मन की ओर से लगाई गई आग को निष्प्रभावी किया था।

खराब मौसम और पाकिस्तानी सेना के लगातार फाइरिंग करने के बाद भी सिख रेजीमेंट ने हिल पर  कब्जा किया था। इस मिशन में 10 जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। जबकि 48 जवान इस मिशन में घायल हुए थे। तब से लेकर अब तर टाइगर हिल भारतीय सेना के कब्जे में है। यह सिख रेजीमेंट की बहादुरी की कहानियों में से एक कहानी है। जब इस रेजीमेंट ने शुरूआत की थी तब इसमें केवल 2 बटालियन थे लेकिन आज इस रेजीमेंट में 19 रेगुलर और 2 रिजर्व बटालियन हैं। गणतंत्र दिवस के इस मौके पर हम इस रेजीमेंट के सैनिकों को सलामी देते हैं।

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