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बड़ी खबर: वोटर आईडी के लिए अब आधार और मोबाइल नंबर जरूरी, इलेक्शन कमीशन ने किया बदलाव

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1 Published : Sep 24, 2025 11:59 pm IST, Updated : Sep 24, 2025 11:59 pm IST

चुनाव आयोग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए अब वोटर आईडी के लिए आधार और मोबाइल नंबर जरूरी कर दिया है। ऑनलाइन वोटर लिस्ट सर्विसेज के लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक बिना आधार लिंक वाले मोबाइल नंबर के कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

चुनाव आयोग- India TV Hindi
Image Source : PTI चुनाव आयोग

नई दिल्ली:  चुनाव आयोग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए अब वोटर आईडी के लिए आधार और मोबाइल नंबर जरूरी कर दिया है। ऑनलाइन वोटर लिस्ट सर्विसेज के लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक  बिना आधार लिंक वाले मोबाइल नंबर के कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक अब वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने या फिर बदलाव करने के लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर देना होगा। 

सिस्टम पूरी तरह से चालू

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने एनडीटीवी को बताया कि करीब एक माह पहले ही यह फैसला ले लिया गया था और आईटी डिपार्टमेंट इसे लागू करने की तैयारी कर रहा था। अब यह सिस्टम पूरी तरह से चालू हो चुका है। अब  बिना आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के कोई आवेदन स्वीकार नहीं होगा।

चुनाव आयोग का यह फैसला ऐसा समय में आया है जब कर्नाटक में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट डिलीशन का विवाद चल रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सिस्टमेटिक वोटर डिलीशन हो रहा है और इसके पीछे एक तीसरी ताकत काम कर रही है।

राहुल गांधी ने लगाया वोट चोरी का आरोप

राहुल गांधी ने दावा किया कि अलंद विधानसभा सीट से 6018 वोटर डिलीट कर दिए गए। राहुल ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह साधारण गलती नहीं बल्कि एक संगठित साजिश है और जल्द ही इस पर और बड़े खुलासे होंगे।

चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज

वहीं कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार ने राहुल के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2022 में अलंद विधानसभा से 6018 वोटरों को हटाने के लिए ऑनलाइन फॉर्म-7 आवेदन मिले थे। इतनी बड़ी संख्या देखकर जांच की गई। जांच में केवल 24 आवेदन सही पाए गए, जबकि 5994 गलत थे और उन्हें रद कर दिया गया। यानी कोई सामूहिक वोटर डिलीशन नहीं हुआ। इस फर्जीवाड़े की जांच के लिए FIR भी दर्ज की गई।

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