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आप की अदालत: रेखा गुप्ता ने केजरीवाल के शीश महल में शिफ्ट न होने का फैसला क्यों लिया, जानें क्या कहा?

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1 Published : Jul 05, 2025 10:19 pm IST, Updated : Jul 06, 2025 12:09 am IST

Aap Ki Adalat: रेखा गुप्ता ने कहा कि मेरे लिए बड़ा आसान था कि वह मुख्यमंत्री आवास था। मैं जाती और वहां रहती परंतु मैंने मना किया कि मैं इस शीश महल में जाकर नहीं रहूंगी। मुझे सरकार कोई ऐसा आवास दे जहां हजारों लोगों से मिल सकूं।

Aap Ki adalat, Rekha Gupta- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV 'आप की अदालत' में रेखा गुप्ता

Aap ki Adalat:  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहली बार इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाए गए करोड़ों रुपये के शीश महल में शिफ्ट न होकर राज निवास मार्ग पर एक रिनोवेटेड बंगले में जाने का फैसला क्यों लिया। वे लोकप्रिय और चर्चित शो 'आप की अदालत' में रजत शर्मा के सवालों का जवाब दे रही थीं। इस शो का प्रसारण आज रात 10 बजे इंडिया टीवी पर होगा। मुख्यमंत्री से यह पूछा गया था कि 'शीश महल' में शिफ्ट होने में क्या नुकसान है? 

रेखा गुप्ता ने कहा: "नींद नहीं आती। मुझे दिखाई देता कि कैसे लोग त्रस्त हैं और केजरीवाल साहब यहीं पर रह कर के मस्त थे। वह पर्दे भी नहीं खोलते थे। जनता की आवाज उनके कानों में नहीं आती थी। वह अपने घर की चारदीवारी के भीतर ही रहते थे। मुझे तो आज भी उनकी पार्टी के एमएलए आकर कहते हैं कि हमने यह सचिवालय कभी देखा ही नहीं कि यहां पर सीएम का ऑफिस भी है। तो आज वह सचिवालय, आज वह पूरा ऑफिस, हजारों लोगों के आने जाने का रास्ता बन गए जो ऐसे गलियारे थे जहां लोगों का आना जाना निषेध था।" रेखा गुप्ता इस साल नवरात्रि के दौरान अपने नए बंगले में शिफ्ट हो सकती हैं क्योंकि वहां रिनोवेशन का काम चल रहा है। शुक्रवार को बंगले में विशेष हवन और पूजा की गई।

24 एसी, 11 लाइट्स, 23 सीलिंग फैन वाला बंगला?

रजत शर्मा ने जब रेखा गुप्ता से 28 जून को सीएम बंगले के लिए पीडब्ल्यूडी द्वारा जारी टेंडर नोटिस का जिक्र किया, जिसमें लिखा है कि मुख्यमंत्री के बंगले में 24 एसी होंगे, पांच स्मार्ट टीवी होंगे। 9-9 लाख रुपए के, तीन बड़े झूमर लगेंगे, 115 लाइट्स लगेंगी, 23 सीलिंग फैन लगेंगे, 6 गीजर होंगे। हाई क्वालिटी आरओ होगा, 10 फ्लड लाइट्स होंगी, एडवांस सीसीटीवी होगा और टॉप क्लास इंटरनेट कनेक्शन होगा। इस पर रेखा गुप्ता ने कहा- "वो व्यक्ति जो रामलीला ग्राउंड के आंदोलन से निकला। मैं कुर्सी नहीं लूंगा। मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं गाड़ी नहीं लूंगा, मैं बंगला नहीं लूंगा और उसके बाद में वो 80 करोड़ जनता के खून पसीने की कमाई के पैसे से अपने पर्सनल यूज के लिए एक घर बनवाते हैं जहां पर करोड़ों रुपए के परदे होते हैं। करोड़ों रुपए का बाकी सामान होता है, out of way  जाकर आप करते हैं और जनता जब उन पर प्रश्न करती है तो दरवाजे बंद कर लेते हैं। कोई एक जन अंदर नहीं जा पाता था। वो उनके पर्सनल यूज़ की चीज थी। पर आज दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाते जो कुछ भी मेरे पास सुविधा है वह दिल्ली की जनता की है। आज यदि मुझे चार महीने मुख्यमंत्री बने हुए हैं तो मेरे पास यदि जगह नहीं है तो मैं अपनी गली में टेबल चेयर लगाकर बैठती हूं और हजारों लोगों से रोजाना मिलती हूं। मैं उनकी जनसुनवाई करती हूं। आज तक मुझे सरकार की ओर से कोई सरकारी आवास नहीं मिला। पर यदि आज जो आवास मुझे दिया जा रहा है वह भी आज तक के इतिहास में शायद ही किसी मुख्यमंत्री ने लिया हो कि एक जगह जहां पर एलजी के फोर्थ ग्रेड का कर्मचारी बैठता हो। क्योंकि मुख्यमंत्री आवास के नाम पर कुछ था नहीं। मेरे लिए बड़ा आसान था कि वह मुख्यमंत्री आवास था। मैं जाती और वहां रहती परंतु मैंने मना किया कि मैं इस शीश महल में जाकर नहीं रहूंगी। मुझे सरकार कोई ऐसा आवास दे जहां हजारों लोगों से मिल सकूं। क्योंकि हजारों लोग आपसे मिलने आते हैं, उनको अटेंड करने के लिए आवास मिलेगा तो मैं वहां रहूंगी। अन्यथा मैं नहीं रहूंगी। तो आज एक घर जिसमें रोजाना आपकी पब्लिक डीलिंग हो सकती है, सुबह सवेरे जब चाहे लोग आ सकते हैं, वह मुझे दिया और मेरा घर सबके लिए खुला है। केजरीवाल साहब के यहां तो कोई जा नहीं सकता था।"

'मेरा समय आपका है और मेरा घर भी आपका'

"मेरा घर उन सभी के लिए खुला है जो मुझसे मिलना चाहते हैं। मुख्यमंत्री आपकी है, मेरा समय आपका है और मेरा घर भी आप ही का है। आज मेरे घऱ के रिनोवेशन में जो खर्च हो रहा है उतने के तो उनके (अरविंद केजीरवाल) डोरमैट और पर्दे लगे हुए थे। बिल्कुल ट्रांसपैरेंट है मेरा जीवन। मैं उनकी (अरविंद केजरीवाल) तरह खुफिया मीटिंग नहीं करती। मेरे पास में 100 मोबाइल का बेड़ा नहीं है कि आज पकड़े गए तो ये तोड़ वो तोड़ दो। मेरे पास एक नंबर है। एक घर है। जनता जहां कहेगी वहां रहूंगी, नहीं तो कहीं भी दिलों में रह लूंगी। आज भी सड़कों पर रहती हूं।" यह पूछे जाने पर कि अब शीश महल का क्या होगा, रेखा गुप्ता ने जवाब दिया: "हमारी यही योजना है कि जनता का पैसा जो वहां पर बर्बाद किया गया। कोशिश हमारी रहेगी कि उसके लिए हम ऐसा निर्णय लें कि जो पैसा वहां लगा है वह फिर से खजाने में आए और उससे जनता को लाभ हो, काम हो।"

यमुना, मोहल्ला क्लीनिक, झुग्गी-झोपड़ियां

मुख्यमंत्री ने यमुना की सफाई, मोहल्ला क्लीनिक, शिक्षा, आवारा गायों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं समेत कई मुद्दों पर बात की। यमुना की सफाई पर मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार सभी मोर्चों पर लड़ रही है। हमारे प्रधानमंत्री से लेकर आम आदमी तक, हर कोई यमुना के बारे में चिंतित है। यमुना के माध्यम से दिल्ली में आने वाला सारा ताजा पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। नजफगढ़ और शाहदरा नाले सहित करीब 200 नाले यमुना में गिरते हैं। कहीं गंदगी भरे सिल्ट,कूड़ा मलबा सब यमुना जी में गिरता था। कभी उस सरकार ने काम नहीं किया। हमने सबसे पहले बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) के स्तर को सुधारने के लिए नालों को ट्रैप करने का फैसला किया। पता किया तो 38 एसटीपी प्लांट थे। उनमें से 22 डीपीसीसी की गाइडलाइन, उसके स्टैंडर्ड पर खरे नहीं उतरते तो चलते ही नहीं थे। रोज लगभग 3800 मीट्रिक एमएलडी सिल्ट नालों में से निकलता है। प्रोसेस हजार बारह सौ भी नहीं हो पाता है। पूरा का पूरा नदी में चला जाता है। आज सरकार ने आते ही सबसे पहले उन सारे नालों की टैपिंग की योजना बनाई। उनके ऊपर जो पुराने एसटीपी बने हुए थे, उनको अपडेटेड और अपग्रेडेड करने के लिए काम किया। फिर नए डिसेंट्रलाइज्ड एसटीपी। क्योंकि जब तक आप नालों को सुधारोगे नहीं, उसका पानी साफ नहीं होगा। आज दिल्ली में इतने सारे इंडस्ट्रियल एरिया हैं, उनसे निकलने वाली गंदगी पर कोई टैपिंग नहीं है। एसटीपी में इतना केमिकल मिला हुआ है कि जो नदी में गिरता है तो झाग बनता है। उन सब को टैप करने का काम हम कर रहे हैं। आज जो हरियाणा की तरफ से फैक्ट्रीज का फ्लोएंट आता है उसको टैप करने के लिए हमने हरियाणा से बात की। यमुना जी में गिरने वाला एक लीटर पानी भी स्वच्छ होकर उसके अंदर आए इसकी पूरी कार्ययोजना बना करके 9000 करोड़ का बजट हमने इस साल रखा है। लगातार स्टेप बाय स्टेप हम आगे बढ़ रहे हैं। यह काम एक दिन में पूरा नहीं हो सकता। उसमें जिन एक्सपर्ट्स को इनवॉल्व करना था, जिन टेक्नोलॉजी को लेना चाहिए था, वो सारा काम इन चार महीनों के दौरान हमने किया। दिल्ली की 1700 कॉलोनियां जो अनॉथराइज्ड हैं, उनमें सीवर लाइन है ही नहीं, उन सबमें सीवर लाइन डालने का काम शुरू किया। यमुना में जितना सॉलिड वेस्ट है, जितना मलबा पड़ा हुआ है उसे हटाकर यमुना का प्रवाह बढ़ाने के लिए हम हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।" 

'नानी याद आ जाएगी' वाली धमकी पर क्या बोलीं रेखा गुप्ता?

केजरीवाल की धमकी पर कि अगर 40 लाख झुग्गीवासी सड़कों पर उतर आए तो 'नानी याद आ जाएगी', इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, "नानी मुझे क्यों याद आएगी? क्योंकि केजरीवाल साहब इतना उलझाकर गए हैं। उन्होंने पूरी तरीके से यह तैयारी कर रखी है कि दिल्ली का विकास नहीं किया जा सके। जब तक वह रहे, ना उन्होंने पॉल्यूशन पर काम किया, ना उन्होंने कूड़े के पहाड़ को लेकर काम किया, ना कभी इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया। केवल दिल्ली के लोगों को उन्होंने फ्रीबीज दिखाई। पानी बिजली की बात करते रहे। एक फ्लाईओवर, एक नया इंफ्रास्ट्रक्चर, एक डेवलपमेंटल काम उनके द्वारा कभी दिल्ली में किया नहीं गया। आप चाहते हैं कि गरीब वहीं बसा रहे, उसके जीवन में कभी उजाला आए ही ना और इसीलिए आप उसको भड़काना चाहते तो दिल्ली की जनता इतनी बेवकूफ नहीं है। झुग्गी में भी समझदार लोग रहते हैं। उन्हें मालूम है कि उन्हें क्या करना है और किसके साथ रहना है। तो केजरीवाल साहब आप कोशिश करके देख लीजिए कि क्या 40 लाख लोग आपके लिए आते हैं या उनकी योजनाओं पर काम करने वाली, उनको सुविधा देने वाली सरकार के साथ आते हैं। दिल्ली का दुर्भाग्य देखिए 27 साल सरकार ने राज किया, 15 साल कांग्रेस ने, 10 -12 साल केजरीवाल साहब ने जिन्होंने हमेशा यह कोशिश की कि गरीब गरीब बना रहे, उसको कभी कोई सुविधा न दी जाए, कोई मकान ना दिया जाए। 50,000 फ्लैट बनकर तैयार खड़े रहे। केंद्र सरकार ने बनाए कि गरीब आदमी को दे दीजिए। वह खंडहर हो गए। करोड़ों रुपए का इन्वेस्टमेंट खत्म हो गया परंतु कभी गरीब को दिए नहीं। ये मोदी जी थे जिन्होंने कहा कि आप को झुग्गी के बदले मकान देंगे, बेहतर घर देंगे और देना शुरू किया। 

आज जिन मकानों की बातें वो कर रहे हैं, आप मुझे बताइए कि जिन लोगों को मकान दे दिए गए हैं, झुग्गियों की वो जगह उनसे खाली नहीं करवाई जाएगी। जो एजेंसी है वह खाली कराएगी कि नहीं कराएगी? या फिर जो लोग रेलवे लाइन के बिल्कुल बगल में, ट्रेन की पटरी के ऊपर बस गए हैं, सिक्योरिटी थ्रेट है, सिग्नल दिखाई नहीं देता है, अगर उनको कोर्ट के ऑर्डर से सम्मान से हटाए जाने का आदेश हो तो क्या उनको हटाया नहीं जाएगा? वे दिल्ली के झुग्गी वालों को बार-बार डरा-डरा कर उनको मिसगाइड करके यह कहना चाहते हैं कि भाई आप का मकान टूट रहा है, जबकि यह पहली सरकार है जिसने झुग्गी वासियों को मकान देने की बात कही। झुग्गीवासी के लिए एक पैरामीटर 2015 में बना जो खुद आम आदमी पार्टी की सरकार ने बनाया कि 2015 से पहले जो दिल्ली में आकर बसे हैं उनको मकान दिए जाने चाहिए। तो आज उस पैरामीटर के अंदर जो लोग आ रहे हैं उनका रजिस्ट्रेशन हो रहा है और उनको मकान दिए जा रहे हैं। जो लोग उसमें बच गए वे कहते हैं कि हमारा भी मकान होना चाहिए तो या तो हमारे पास दो तरीके हैं कि आपकी (केजरीवाल) बनाई हुई पॉलिसी गलत थी। या हम इस पॉलिसी को बदलें और यह कहें कि जो दो महीने पहले आया उसको भी मकान देंगे। तो जो टैक्सपेयर है वह हमसे पूछेगा कि मैं टैक्स दे रहा हूं और तुम लोग कल के आए हुए व्यक्ति को भी दे रहे हो, 15 साल वालों को भी दे रहे हो। 40 साल वाले को भी... तो कहीं तो रुकना पड़ेगा। हम पूरे पारदर्शी तरीके से दिल्ली के हर वो व्यक्ति जो झुग्गी झोपड़ी में रहता है, उसे बेहतर सुविधाएं, बेहतर मकान और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर देना चाहते हैं।" 

रेखा गुप्ता ने कहा, "दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियां के कुल 675 क्लस्टर हैं लेकिन एक्शन मात्र चार पर हुए हैं। उसमें से तीन पर कोर्ट केस था और 1 की लैंडिंग owning एजेंसी ने उनको ऑलरेडी मकान दे दिए थे, उसने खाली कराए।  इन चार के अलावा दिल्ली में किसी पर कोई एक्शन नहीं हुआ। आप (केजरीवाल) कुंभकरण की तरह हैं। केजरीवाल साहब छह महीना पंजाब में राजनीति करते रहे। तब उनको दिल्ली की याद नहीं आई। उनको नहीं पता कि इन चार महीनों में दिल्ली कितना आगे बढ़ गई है। पर आज जैसे ही मौका लगा, पंजाब का चुनाव खत्म हुआ तो तुरंत कूद कर आ गए और फिर  झुग्गी वालों की बात करने लगे। इतने साल आप सत्ता में रहे, एक भी झुग्गी वाले को आपने मकान दिया? अब मुझे बताइए कोई झुग्गी वाला नहीं मिलेगा जो यह कह सके कि मुझे केजरीवाल सरकार ने मकान दिया, एक भी नहीं मिलेगा। हमारी सरकार लाखों लोगों को मकान देने की योजना बना रही है और सीरियसली उस पर काम कर रही है।"

मोहल्ला क्लीनिक योजना "बड़ा धोखा"

केजरीवाल की मोहल्ला क्लीनिक योजना को "बड़ा धोखा" बताते हुए रेखा गुप्ता ने कहा: "वो ढोंग और आडंबर की सरकार थी उसको प्रोपेगेंडा करने का तरीका मालूम था। पब्लिसिटी कैसे होती है यह मालूम था। मोहल्ला क्लीनिक क्या था? सड़क किनारे नालों के ऊपर एक पोर्टा केबिन लगा दिया। वहां पर एक ऐसा डॉक्टर बिठाया जिसको यह कहा गया कि हर पेशंट पर 40 रुपये तुम्हें मिलेंगे। तो आप बताइए डॉक्टर मरीज ठीक करेगा कि पेशंट की लाइन लगाएगा। फिर वो उसमें भ्रष्टाचार कि एक दिन में मैंने 500 पेशंट अटेंड किया, उसके हिसाब से मुझे पेमेंट दिया जाए। ना जहां दवाई थी, ना जहां वैक्सीनेशन था, उसका क्या कंपैरिजन है? आरोग्य मंदिर आपका फुल फ्लेज्ड प्राइमरी हॉस्पिटल है, डिस्पेंसरी है, जिसके अंदर मेडिकल स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ,  नर्सिंग स्टाफ वो सब लोग होते हैं। वहां पर दवाई आपको मिलेगी। वहां आपको वैक्सीनेशन मिलेगी। आपको वहां ट्रीटमेंट मिलेगा, आपको वहां फर्स्टएड मिलेगी। यहां तक कि वहां पर टेस्टिंग का भी पूरा प्रोविजन है। आज दिल्ली में हमने 1100 से अधिक आरोग्य मंदिर बनाने का जो काम शुरू किया है जिसमें कि लगभग 100 आरोग्य मंदिर दिल्ली में बना चुके हैं। मोहल्ला क्लीनिक तो एक फ्रॉड था। दिल्ली की जनता की आंखों में धूल झोंक कर के उनके पैसे का दुरुपयोग करना और जिसमें फैसिलिटी नाम की कोई चीज नहीं थी।"

'आप' सरकार ने कैसे पैसे की बर्बादी की?

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि AAP सरकार ने सिविल डिफेंस में कॉन्ट्रैक्ट पर लोगों की नियुक्ति करके धन की बर्बादी की। उन्होंने कहा," दिल्ली सरकार में 500 सिविल डिफेंस वाले की जरूरत थी लेकिन उन्होंने  25 हज़ार लोगों को नियुक्त कर दिया। उनको बीच बीच में ऑड इवन का काम दे दिया। कभी रेड लाइट में खड़े कर देते थे कि बत्ती बंद रखिए। उनको लाखों रुपए देते रहते थे। हजारों करोड़ रुपए उन्होंने इसी भ्रष्टाचार में निपटा दिए। एक व्यक्ति केवल जिसका काम तख्ती पकड़ना है, उसको दिन का हजार रुपए मिल रहा। 30,000 रुपये इंजीनियर लोग नहीं ले रहे हैं, वह तख्ती पकड़ने वाला लेता था और जब कोर्ट के आदेश हुए कि आप गलत कर रहे हैं, भ्रष्टाचार हुआ है... तो सब को निकाल दिया। अब वह 20-  25 हजार लोग बेरोजगार हो गए। इसी तरह बस में मार्शल नियुक्त किए गए। आज इलेक्ट्रॉनिक बसें आ गईं, जिसमें कैमरा भी है, पैनिक बटन भी है, सब कुछ है। मार्शल की जरूरत नहीं है। वो मार्शल अब रोज पूछते हैं हमारा क्या होगा जी, हमारा क्या होगा जी... इतने सालों तक एक भी परमानेंट एम्पलाई नहीं लगाया । सब कॉन्ट्रैक्ट पर चलता रहा। पहली बार सरकार ने इस 15- 20 साल के शासनकाल के बाद परमानेंट जॉब क्रिएट की। हम अभी 6 तारीख को 1500 नर्सों को अपॉइंटमेंट लेटर दे रहे हैं। अब परमानेंट नर्सेज आएंगी तो जो कॉन्ट्रैक्ट वाली थी वो पूछेंगी कि हमारा क्या होगा?  इस तरह की समस्याएं मेरे लिए छोड़ कर गए। मेरे लिए यह थोड़ा ज्यादा तकलीफदायक है कि काम तो नहीं किया लेकिन कम से कम सिस्टम को नहीं उलझाते।

पुराने वाहनों की समस्या पर क्या बोलीं रेखा गुप्ता?

दिल्ली में पुराने वाहनों को ईंधन देने से इनकार करने के हालिया विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा: " दिल्ली का दुर्भाग्य यही है कि आज देश की राजधानी होने के बावजूद विश्व के मानचित्र में दिल्ली को सबसे पॉल्यूटेड सिटी घोषित कर दिया गया है। पिछली सरकारों ने इस जिम्मेदारी को कभी नहीं निभाया कि दिल्ली में रहने वालों के लिए स्वच्छ हवा का प्रबंध करें। ऐसा कुछ काम करें कि जिससे फॉल्यूशन खत्म हो। दिल्ली गैस चैंबर बन गई बजाय उसको ग्रीन कैपिटल बनना चाहिए था। उसके बाद में कोर्ट ने संज्ञान लेना शुरू कर दिया। फिर एनजीटी ने ऑर्डर करने शुरू कर दिए। उसके बाद CAQM ने अपनी किताबें खोल ली कि हम दिल्ली को ठीक करेंगे। सबने अपने-अपने ऑर्डर निकाल दिए और यह जो ऑर्डर है कि 15 साल से पुरानी गाड़ी को पेट्रोल नहीं मिलेगा, ये सरकार का आदेश नहीं है। ये माननीय कोर्ट का आदेश है, एनजीटी का आदेश है, CAQM का आदेश है और मैं खुद इस चीज से वाकिफ हूं। मैं खुद यह सोचती हूं कि यह ठीक नहीं है।"

उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली की जनता को पूरी तरीके से आश्वस्त करती हूं कि उनकी सोच, उनका विजन और उनके अधिकारों की बात हम खुद हर प्लेटफॉर्म पर रखेंगे। चाहे वह कोर्ट हो, चाहे एनजीटी हो और चाहे प्रशासन। हम दिल्ली की जनता के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। ऐसे हजारों केसेस हैं। मेरे पिताजी गाड़ी को रखते थे कभी किसी शादी ब्याह में जाएंगे तो चलाएंगे और खुद स्कूटर पर जाते थे। ऐसे हजारों परिवार मिडिल क्लास फैमिली है जो गाड़ी को Occasionally यूज करती है और यह कहां का न्याय है कि दिल्ली एनसीआर पेट्रोल दे सकता है और दिल्ली नहीं दे सकती... तो कोई आधा किलोमीटर जाकर बाहर से पेट्रोल नहीं ले लेगा क्या?  सरकारों ने कभी इस मुद्दे को रिप्रजेंट नहीं किया। पिछली सरकार ने जो गाड़ियों को स्क्रैप करने का आदेश बनाया, पिछले डेढ साल से गाड़ियों को स्क्रैप कर रहे थे और ऐसे उठाकर ले जाते हैं जैसे कि बिल्कुल कोई रेड कर दिया। यह दिल्ली की जनता के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। काम सरकारें नहीं करती थी और झेलना लोगों को पड़ता था। पर अब नहीं होगा, अब नहीं होगा। दोनों चीजें करेंगे हम। हम काम भी करेंगे जनता के हित में और अन्याय झेलने भी नहीं देंगे। आवाज उठाएंगे, बुलंदी से उठाएंगे।"

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