बांग्लादेश को मिली नई सरकार, BNP नेता तारिक रहमान ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ, 10 प्वाइंट में उनके बारे में जानिए
बांग्लादेश को मिली नई सरकार, BNP नेता तारिक रहमान ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ, 10 प्वाइंट में उनके बारे में जानिए
Written By: Rituraj Tripathi@riturajfbd
Published : Feb 17, 2026 03:54 pm IST,
Updated : Feb 17, 2026 04:22 pm IST
बांग्लादेश को आखिरकार अपना नया नेता मिल गया है। BNP नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। गौरतलब है कि सोमवार को अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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तारिक रहमान ने ली प्रधानमंत्री पद की शपथ
ढाका: बांग्लादेश को अपनी नई सरकार मिल गई है। तारिक रहमान ने आज प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। गौरतलब है कि बांग्लादेश लंबे समय से अपने नेता की कमी महसूस कर रहा था क्योंकि साल 2024 में यहां शेख हसीना की सरकार गिर गई थी और इस दौरान काफी हिंसा भी हुई थी। इसके बाद मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश के अंतरिम नेता के तौर पर देश का नेतृत्व तो किया लेकिन वह बांग्लादेश के “मुख्य सलाहकार” के रूप में देश का नेतृत्व कर रहे थे।
सोमवार को अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने दिया था पद से इस्तीफा
सोमवार को अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और सत्ता की चाबी नवनिर्वाचित सरकार को सौंप दी थी। हालांकि सोमवार को पद छोड़ने के दौरान यूनुस ने कहा था, "आज अंतरिम सरकार पद छोड़ रही है। लेकिन लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की जो प्रक्रिया शुरू हुई है, उसे रोका न जाए।”
BNP ने चुनाव में हासिल की थी शानदार जीत
हालही में बांग्लादेश में चुनाव हुए थे, जिसमें बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) और उसके नेता तारिक रहमान ने भारी जीत हासिल की थी। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने 297 में से 209 सीटें जीती थीं और देश में अपनी सरकार बनाने का रास्ता साफ किया था। वहीं दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने 13वें संसदीय चुनाव में 68 सीटें जीती थीं। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था।
तारिक रहमान के बारे में जानिए
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ।
तारिक रहमान, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के बेटे हैं।
वह 36 साल बाद देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बने हैं।
उन्होंने 17 साल का निर्वासन भी झेला है और जेल, यातनाएं और राजनीतिक साजिशें भी सही हैं। इस दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी में भी गंभीर समस्या आई।
वह 1990 से राजनीति में सक्रिय हैं और 1991 में मां खालिदा को पीएम बनवाने में उनका बड़ा रोल था।
शेख हसीना के शासन में एक मामले में तारिक को मौत की सजा तक सुनाई गई थी। हालांकि इस दौरान वह निर्वासन में थे और बांग्लादेश वापस नहीं लौटे।
साल 2024 में जब शेख हसीना के खिलाफ छात्र आंदोलन हुआ, तब तारिक की स्वदेश वापसी का सफर शुरू हुआ।
अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में तारिक के खिलाफ चल रहे मुकदमे रद्द किए गए। इससे उन्हें काफी राहत मिली।
दिसंबर 2025 में उन्होंने लंदन से बांग्लादेश वापसी की घोषणा की। जब वह ढाका लौटे तो उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया।
इसके बाद तारिक चुनावी मैदान में उतरे और ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से चुनाव लड़ा। उन्होंने दोनों जगह से जीत हासिल की।