दिल्ली में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर ग्लोबल Impact Summit चल रही है। पांच दिनों के इस सम्मेलन में 100 से ज़्यादा देशों के लोग और कंपनियां भाग ले रही हैं। इस AI समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुला डा सिल्वा, ब्रिटेन के दो पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ऋषि सुनक शामिल होंगे।
स्विटज़रलैंड, स्पेन, स्लोवाकिया, सर्बिया, क्रोएशिया, एस्टोनिया, नीदरलैंड्स, फिनलैंड ,ग्रीस, मॉरीशस, भूटान, श्रीलंका और कज़ाख़िस्तान के साथ-साथ बोलीविया, गयाना और सेशेल्स के नेता भी शिरकत करेंगे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी AI समिट को संबोधित करेंगे।
इससे पहले फ्रांस और दक्षिण कोरिया इस तरह के सम्मेलन आयोजित कर चुके हैं। ये पहला मौका है जब ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट किसी विकासशील देश में हो रही है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में काम करने वाली सैकड़ों कंपनियों के CEO भी पहुंच चुके हैं। इनमें Open AI के संस्थापक सैम आल्टमैन, गूगल के CEO सुंदर पिचाई और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स शामिल हैं।
भारत ने इस बार AI समिट की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी है। इसका मक़सद आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का आम इंसान के हित में इस्तेमाल करने पर ज़ोर देना है। भारत हमेशा से AI के नैतिक और जनहितकारी इस्तेमाल पर बल देता रहा है। इस समिट में भारत आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनी प्रगति को दुनिया के सामने रखेगा।
विश्व भर से आये राजनीति और व्यापार जगत के नेताओं को ये दिखाया जाएगा कि AI के क्षेत्र में भारत जैसे देश में कितनी संभावनाएं हैं और भारत AI का इन्फास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए कितने डेटा सेंटर्स और कितने लार्ज लैंग्वेज मॉडल तैयार कर रहा है, भारत में AI का इस्तेमाल किस तरह प्रशासन, स्वास्थ्य, रक्षा और दूसरे क्षेत्रों में किया जा रहा है।
मेरा यह मानना है कि सबसे ज़रूरी है, AI का इस्तेमाल रोज़मर्रा की जिंदगी में आने वाली समस्य़ाओं को हल करने के लिए हो। भारी भरकम शब्दों से इसे परिभाषित करके उससे डराया न जाए।
उदाहरण के तौर पर AI का इस्तेमाल ट्रैफिक नियंत्रण के लिए, सड़कों पर ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए, आपातकालीन सेवाओं के लिए, जनकल्याणकारी योजाओं की मॉनिटरिंग के लिए, किसानों को मौसम की जानकारी देने के लिए, real time data processing के लिए किया जाए तो सबका फायदा होगा।
फाइनेंस और अकाउंटिंग के कामों में AI software की सटीकता कमाल की है। Goldman Sachs ने ये AI software तैयार किया है। पहले सॉफ्टवेयर कंपनियां कोडिंग का काम करती थी, अब ये काम AI बड़ी आसानी से कर देता है । इसीलिए ये सुनिश्चित करने की जरूरत है कि AI की वजह से लोग बेरोज़गार न हों।
AI ने कुछ क्षेत्रों में तो कमाल का काम किया है। Immunotherapy पर एक AI device तैयार की गई है जो कैंसर के इलाज में कारगर साबित हो रही है। लंदन पुलिस ने facial recognition टैकनोलोजी पर आधारित AI software तैयार किया है। महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले दोषियों पर AI के ज़रिए नजर रखी और एक महीने में 105 अपराधियों को जुर्म करने से पहले ही दबोच लिया।
इसी तरह यूपी की आयुर्विज्ञान यूनीवर्सिटी ने एक AI tool तैयार किया है, जो 20 सेकंड में चेहरे को स्कैन करके सेहत की हाल बता देगा। Nature मैगज़ीन में एक लेख छपा है, जिसमें बताया गया कि Stanford University ने एक AI tool तैयार किया है, जो किसी भी व्यक्ति की एक दिन की नींद पर नज़र रखेगा, और 130 बीमारियों के जोखिम के बारे में पहले ही बता देगा।
एक बात ये ध्यान देने की है कि AI सॉफ्टवेयर में भारत काफी पीछे है। इसीलिए अब हमारा फोकस हार्डवेयर की तरफ है, डेटा सेंटर्स बनाने पर है और एक ऐसा ecosystem तैयार करने पर है जिसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को AI के इस्तेमाल और AI के विकास में जोड़ा जा सके। AI सब के पास हो, सब के लिए हो। (रजत शर्मा)
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