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कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट से नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Mangal Yadav
 Published : Dec 09, 2025 11:52 am IST,  Updated : Dec 09, 2025 12:36 pm IST

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी- India TV Hindi
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी Image Source : PTI

नई दिल्लीः कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को दिल्ली की राऊज़ एवेन्यू कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। भारतीय नागरिकता के बिना मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के आरोपों पर दाखिल रिवीजन पिटीशन पर कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है। यह रिवीजन पिटीशन वकील विकास त्रिपाठी ने दायर की है।  

याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट पवन नारंग ने तर्क दिया कि इस मामले पर दोबारा विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि रिकॉर्ड में रखे गए दस्तावेज़ों से पता चलता है कि सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले वोटर लिस्ट में उनका नाम शामिल करने के तरीके में गंभीर अनियमितताएं थीं। सेशंस जज विशाल गोगने ने दलीलें सुनने के बाद सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया। अभियोजक ने राज्य की ओर से नोटिस स्वीकार किया। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि रिवीजन में उठाए गए मुद्दों के पूरे मूल्यांकन के लिए ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड (TCR) को मंगाया जाए।  

 

6 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

दिल्ली के वकील ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया और TCR मंगवाया है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।

मामला क्या है?

आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की वोटर लिस्ट में था लेकिन उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी। याचिका में सवाल उठाया गया कि नागरिक न होते हुए 1980 में वोटर लिस्ट में नाम कैसे शामिल हुआ? याचिका में दावा किया गया है कि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से डिलीट भी किया गया। याचिका में पूछा गया है कि जब नागरिकता 1983 में मिली, तो 1980 में वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करने के लिए कौन से दस्तावेज़ दिए गए? क्या इसमें जालसाजी या गलत दस्तावेज़ का इस्तेमाल हुआ? मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में यह याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ अब रिवीजन पिटीशन दायर की गई है।

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