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त्योहारों पर पटाखें जला पाएंगे या नहीं? केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कर दी ये खास मांग

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Oct 10, 2025 04:54 pm IST,  Updated : Oct 10, 2025 05:01 pm IST

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि बच्चों को ‘ग्रीन पटाखों’ के साथ दीवाली मनाने दें। कोर्ट ने ग्रीन क्रैकर्स पर आदेश को सुरक्षित रख लिया है।

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सुप्रीम कोर्ट में पटाखों पर सुनवाई। (सांकेतिक फोटो) Image Source : PTI

भारत समेत दुनिया के विभिन्न देशों में दीवाली का त्योहार आने वाले 20 अक्टूबर को धूमधाम से मनाया जाएगा। दिवाली के अवसर पर बच्चों को पटाखे जलाने का भी काफी शौक होता है। हालांकि, बीते कुछ समय से पटाखों के कारण प्रदूषण में काफी इजाफा हुआ है। इस कारण पटाखे जलाने पाबंदियां और नियम लगाए गए हैं। अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बड़ी अपील की है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मांग की है कि बच्चों को ‘ग्रीन पटाखों’ के साथ दीवाली मनाने दिया जाए।

क्रिसमस और न्यू ईयर पर भी छूट की मांग

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि त्योहारों के अवसर पर ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की इजाजत दी जाए। सरकार ने कहा है कि "क्रिसमस और न्यू ईयर की रात को रात 11:45 बजे से 12:30 बजे तक, और गुरुपुरब पर एक घंटे के लिए, पटाखे फोड़े जा सकें। इसके अलावा, बाकी मौकों पर सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए।"

बच्चों को पूरे जोश और खुशी के साथ दीवाली मनाने दें- SG

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि दीवाली और अन्य त्योहारों पर पटाखे फोड़ने के समय में थोड़ी ढील दी जाए। उन्होंने कहा– "हमारे बच्चों को पूरे जोश और खुशी के साथ दीवाली मनाने दें।" सरकार का कहना है कि ग्रीन पटाखे प्रदूषण को कम करते हैं और इनका इस्तेमाल पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सीजेआई ने ग्रीन कैकर्स पर आदेश सुरक्षित रखा है। जस्टिस गवई ने संकेत दिया कि दीवाली में ग्रीन कैकर्स को मंजूरी मिलेगी। CJI ने सवाल किया कि क्या 2018 से 2024 के बीच प्रदूषण का स्तर (index) कम हुआ है? क्या 2018 की तुलना में 2024 का AQI (Air Quality Index) बेहतर हुआ है? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया- "प्रदूषण का स्तर लगभग समान ही रहा है, सिर्फ कोविड के समय (जब लॉकडाउन था) में यह काफी कम हो गया था। पर्यावरण मंत्रालय ने एक हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। इसमें कहा गया कि नीरी के पास ग्रीन कैकर्स के फॉरमेशन को जाँचने का तंत्र है। हालांकि निगरानी का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है।"

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