तमिलनाडु के कोयंबटूर में दो अस्पतालों ने मिलकर पहली बार अदला-बदली के माध्यम से सफलतापूर्वक यकृत (लिवर) ट्रांसप्लांट कर गंभीर बीमारी से जूझ रहे दो मरीजों को नई जिंदगी दी। अस्पतालों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, ये मरीज लीवर संबंधी विकार के अंतिम चरण में थे। यह जटिल प्रक्रिया 3 जुलाई को कोयंबटूर के जीईएम अस्पताल और श्री रामकृष्ण अस्पताल के संयुक्त प्रयासों से दोनों अस्पतालों में एक साथ की गई।
एक विज्ञप्ति के मुताबिक, “पारंपरिक रूप से होता यूं कि मरीज को अगर जरूरत है तो उसका कोई रिश्तेदार सीधे तौर पर रोगी को लीवर दान कर सकता है, इसके विपरीत अदला-बदली के मामलों में उन मरीजों को राहत मिलती है, जिनके अपने परिवार में कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं है और वे समान स्थिति वाले किसी अन्य परिवार के साथ लीवर का आदान-प्रदान कर सकते हैं।” विज्ञप्ति में बताया गया कि इस पद्धति से उन लोगों की संख्या बढ़ी है, जो दान करना चाहते हैं और लीवर रोग के अंतिम चरण से जूझ रहे रोगियों में उम्मीद की नई किरण जगी है क्योंकि उन्हें या तो पहले लंबा इंतजार करना पड़ता था या फिर उनके पास कोई व्यवहार्य उपचार विकल्प नहीं होता था।
डॉक्टरों ने इस सफल सर्जरी को ‘एक ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि’ भी करार दिया। विज्ञप्ति के मुताबिक, जीईएम अस्पताल में भर्ती सलेम के रहने वाले 59 वर्षीय एक व्यक्ति और श्री रामकृष्ण अस्पताल में भर्ती तिरुप्पुर के रहने वाले 53 वर्षीय एक व्यक्ति की लीवर अदला-बदली की सर्जरी की गई। इसमें कहा गया है कि दोनों रोगियों की पत्नियां ब्लड डोनेट करने को तैयार थीं लेकिन उनका ब्लड ग्रुप असंगत पाया गया और इसलिए सीधे ब्लड डोनेशन की संभावना को खारिज कर दिया गया। डॉक्टरों ने हालांकि पाया कि प्रत्येक रोगी को लीवर दान करने वाले व्यक्तियों की अदला-बदली की जा सकती है और यही एकमात्र व्यवहार्य समाधान था।
जीईएम हॉस्पिटल के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. सी. पलानीवेलु ने कहा, “इसके लिए कई कानूनी, नैतिक और तार्किक चुनौतियों से निपटना पड़ा। हमें अंग को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए तमिलनाडु राज्य प्रत्यारोपण प्राधिकरण से विशेष मंजूरी लेनी पड़ी।” उन्होंने बताया कि इसके अलावा, अस्पतालों को एक साथ सर्जरी सुनिश्चित करनी थी और दोनों अस्पतालों के बीच एक वास्तविक समय संचार प्रोटोकॉल स्थापित करना था।
श्री रामकृष्ण अस्पताल के प्रबंध न्यासी आर. सुंदर के अनुसार, यह उपलब्धि तमिलनाडु की चिकित्सा उत्कृष्टता का एक सच्चा प्रमाण है। उन्होंने कहा, “जीईएम अस्पताल और श्री रामकृष्ण अस्पताल के अत्यधिक कुशल चिकित्सतों की टीमों ने इस जटिल प्रक्रिया को अत्यंत सटीकता व समर्पण के साथ अंजाम दिया।” सुंदर ने बताया कि दोनों मरीजों की हालत में सुधार हो रहा है। जीईएम अस्पताल के निदेशक डॉ. पी. प्रवीण राज ने बताया कि मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 2014 के तहत अदला-बदली प्रत्यारोपण पहले से ही विनियमित है लेकिन अंतर-अस्पताल समन्वय ने सुरक्षा के नए आयाम स्थापित किए हैं। (भाषा इनपुट्स के साथ)
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