Wednesday, February 04, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. भारत के सशस्त्र बलों ने शुरू किया 'अभ्यास त्रिशूल', अंतरिक्ष, साइबर और ड्रोन शक्ति से है लैस, देखें Video

भारत के सशस्त्र बलों ने शुरू किया 'अभ्यास त्रिशूल', अंतरिक्ष, साइबर और ड्रोन शक्ति से है लैस, देखें Video

भारत के सशस्त्र बलों ने 'अभ्यास त्रिशूल' शुरू किया है जो कि अंतरिक्ष, साइबर और ड्रोन शक्ति से लैस है। सेना के इस अभ्यास का Video भी सामने आया है।

Reported By : Manish Prasad Edited By : Subhash Kumar Published : Nov 06, 2025 11:38 am IST, Updated : Nov 06, 2025 11:38 am IST
indian army trishul excercise- India TV Hindi
Image Source : REPORTER भारतीय सेना का अभ्यास त्रिशूल।

अभ्यास त्रिशूल (Exercise Trishul) में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना के साथ-साथ बीएसएफ और तटरक्षक बल ने संयुक्त वॉर क्षमता, तालमेल और आधुनिक तकनीकी दक्षता का अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है। इस बार के त्रिशूल अभ्यास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक मल्टी-डोमेन (बहु-क्षेत्रीय) युद्धाभ्यास है — जो पारंपरिक थल, जल और वायु क्षेत्र से आगे बढ़कर अब अंतरिक्ष और साइबर जगत तक पहुंच गया है। अंतरिक्ष: रणनीतिक शक्ति का नया आधार,इस श्रृंखला के अभ्यास में पहली बार अंतरिक्ष आधारित संचार, निगरानी और टोही प्रणाली (surveillance & reconnaissance systems) को व्यापक रूप से संचालन ढांचे में शामिल किया गया है।

सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रदर्शन

सैटेलाइट इमेजरी और रीयल-टाइम डाटा की मदद से कमांडर अब दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं, मिसाइल प्रक्षेप पथ का विश्लेषण कर सकते हैं और सटीक हमलों की योजना बना सकते हैं। अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का उपयोग सुरक्षित संचार, नेविगेशन और टार्गेटिंग के लिए भी किया जा रहा है, जो भारत की बढ़ती सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं को दर्शाता है। ये प्रयास भारत के उस दृष्टिकोण को सशक्त करते हैं जिसमें अंतरिक्ष को एक “फोर्स मल्टीप्लायर” के रूप में देखा जा रहा है — ताकि सभी युद्ध क्षेत्रों में निरंतर और एकीकृत समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

साइबर युद्ध

अदृश्य रणभूमि,अंतरिक्ष संचालन के साथ-साथ साइबर युद्ध और साइबर सुरक्षा अभियानों को भी त्रिशूल अभ्यास में प्रमुख स्थान दिया गया है। डिफेंस साइबर एजेंसी (Defence Cyber Agency – DCA) की विशेष इकाइयां आक्रामक और रक्षात्मक साइबर मिशन चला रही हैं, जिनमें नेटवर्क में घुसपैठ, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग, और संचार नेटवर्क पर हमले जैसी गतिविधियां शामिल हैं।इन अभियानों के माध्यम से यह परखा जा रहा है कि सशस्त्र बल डिजिटल व्यवधानों के दौरान भी अपने अभियानों को कैसे जारी रख सकते हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य साइबर निगरानी, डेटा की अखंडता और इलेक्ट्रॉनिक प्रतिकार उपायों के माध्यम से जानकारी पर नियंत्रण (Information Dominance) की क्षमता को और मज़बूत बनाना है — जो आधुनिक संकर (Hybrid) युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाती है।

ड्रोन शक्ति

युद्धक्षेत्र का नया आयाम,अभ्यास त्रिशूल में इस बार ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग देखा गया है — जिसमें निगरानी, रसद आपूर्ति, कामिकाज़े (आत्मघाती) और आक्रामक हमले जैसे अभियान शामिल हैं। ये मानवरहित प्रणालियाँ (Unmanned Systems) वास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की जानकारी उपलब्ध करवा रही हैं, दुर्गम इलाकों में सामग्री पहुँचा रही हैं, और सटीक निशाने पर हमले कर रही हैं।

भारतीय सेना

• SWITCH UAVs और Netra Drones उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी और टोही के लिए।

• Nagastra-1 loitering munitions सटीक कामिकाज़े हमलों के लिए।

• टैक्टिकल क्वाडकॉप्टर अग्रिम मोर्चे पर रसद आपूर्ति के लिए।

भारतीय वायुसेना

• Heron और अन्य UAVs दीर्घकालिक निगरानी के लिए।

• स्वदेशी मध्यम ऊँचाई, लंबी अवधि (MALE) ड्रोन संचालन के लिए।

• एयर डिफेंस और कॉम्बैट ड्रोन के विकास पर कार्यरत।

भारतीय नौसेना

• MQ-9B SeaGuardian ड्रोन समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए।

• Harop ड्रोन जहाज आधारित टोही और एंटी-रडार मिशनों के लिए।

अभ्यास त्रिशूल की खास बातें

ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का यह समावेश भारत की युद्ध नीति को नेटवर्क-केंद्रित और स्वायत्त (Autonomous) युद्ध की दिशा में आगे बढ़ा रहा है, जहां सूचना, गति और सटीकता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भविष्य के युद्धों की तैयारी,अभ्यास त्रिशूल में हाल के संघर्षों और अभियानों, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर, से मिले अनुभवों को भी शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है — भविष्य के असममित (Asymmetric) युद्धों के लिए तैयारी करना, जहाँ ड्रोन, साइबर उपकरण और अंतरिक्ष संसाधन पारंपरिक सेनाओं के साथ मिलकर कार्य करेंगे।

आधुनिक युग की ओर कदम

त्रिशूल अभ्यास दर्शाता है कि भारतीय सशस्त्र बल अब काइनेटिक (भौतिक) और नॉन-काइनेटिक (अदृश्य) दोनों प्रकार के युद्धों के लिए तैयार हैं।यह भारत की उस दिशा में अग्रसरता का प्रतीक है जहाँ सेना केवल जमीन, समंदर या आसमान में नहीं, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष के मोर्चों पर भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है।

ये भी पढ़ें- आज ही के दिन हुआ था पानीपत का दूसरा युद्ध, अकबर ने हिंदू महाराजा का सिर काटकर भेजा था काबुल

‘ऑपरेशन सिंदूर के बाद सशस्त्र बलों ने सीखे हैं कई सबक', CDS अनिल चौहान का बयान

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement