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VIDEO: कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेन गए खिलाड़ियों को नहीं मिली सीट, ट्रेन में टॉयलेट के पास बैठकर करना पड़ा सफर

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
Published : Dec 23, 2025 01:59 pm IST, Updated : Dec 23, 2025 07:19 pm IST

उत्तर प्रदेश में 69वें नेशनल स्कूल गेम्स में हिस्सा लेने के बाद ओडिशा लौटते समय कन्फर्म टिकट न होने के कारण स्कूली छात्रों को ट्रेन में टॉयलेट के पास बिठाया गया।

टॉयलेट के पास बैठे खिलाड़ी- India TV Hindi
Image Source : REPORTER टॉयलेट के पास बैठे खिलाड़ी

उत्तर प्रदेश में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूल कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेने गए ओडिशा के 18 युवा खिलाड़ियों के साथ बेहद शर्मनाक और अमानवीय व्यवहार का आरोप सामने आया है। इन खिलाड़ियों में 10 लड़के और 8 लड़कियां शामिल थीं, जिन्हें राज्य की ओर से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भेजा गया था। आरोप है कि मास एजुकेशन विभाग की गंभीर लापरवाही के चलते इन खिलाड़ियों के लिए रेलवे की कन्फर्म टिकट तक की व्यवस्था नहीं की गई।

मजबूरी में बच्चों को सामान्य डिब्बे में सफर करना पड़ा। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई खिलाड़ियों को ट्रेन के टॉयलेट के पास बैठकर यात्रा करनी पड़ी, वह भी कड़ाके की ठंड के बीच।

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में गुस्सा

छोटे-छोटे बच्चे, जो राज्य का प्रतिनिधित्व करने गए थे, उन्हें न तो ठीक से बैठने की जगह मिली और न ही सुरक्षित व सम्मानजनक यात्रा का माहौल। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें खिलाड़ी ट्रेन के शौचालय के पास बैठे नजर आ रहे हैं।

खिलाड़ियों ने भी जताई नाराजगी

वीडियो सामने आने के बाद ओडिशा भर में लोगों में गुस्सा फैल गया है। खेल प्रेमियों, अभिभावकों और आम नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब बच्चे राष्ट्रीय मंच पर राज्य का नाम रोशन करने जाते हैं, तो उनके साथ ऐसा व्यवहार कैसे किया जा सकता है।

बीजू जनता दल ने सरकार की आलोचना की

बीजू जनता दल से राज्यसभा सांसद सुलता देव ने कहा कि यह बहुत ही शर्मनाक घटना है, जिसकी मैं कड़ी से कड़ी निंदा कर रही हूं। बच्चे सभी के बच्चे होते हैं। यह सरकार, जो डबल इंजन की सरकार है, सभी चीजों में फेल है। 17 महीना में सरकार फैलियर हो चुकी है। जो बच्चे ट्रेन में बाथरूम के पास बैठकर गए,उनके दिमाग में क्या चल रहा होगा? सरकार अपनी क्या छाप छोड़ेगी इनके दिमाग पर? मां-बाप कितने लाड प्यार से बच्चों को पलते हैं, अगर आप सही तरीके से बच्चों को लेकर नहीं जा सकते, तो मत लेकर जाइए। मगर इस तरह ले जाकर उनकी बेइज्जती मत कीजिए। 

सांसद ने कहा कि क्या आप अपने बच्चों को बाथरूम के पास बैठ कर लाएंगे? क्या यह एक-दो घंटे का सफर था? एक-दो घंटे के सफर में भी ऐसा नहीं होना चाहिए। खिलाड़ियों को सम्मान देना चाहिए। अगर बच्चों के मानसिकता पर असर पड़ेगा तो वे खेल नहीं पाएंगे, मेडल जितना तो दूर की बात है। बच्चों के माता-पिता को विभाग पर केस करना चाहिए और शो कॉज नोटिस भेजना चाहिए। अगर रिजर्वेशन नहीं था तो बच्चों को क्यों ले जाया गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी हमारे उड़ीसा के हैं। क्या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बच्चों का रिजर्वेशन नहीं है?

सरकार की अभी तक नहीं आई प्रतिक्रिया

स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गंड ने इस मामले पर कहा, "मुझे आपलोगों के माध्यम से इसकी जानकारी मिली। मैंने विभागीय अधिकारियों को जांच के आदेश दे दिए हैं। हम मामले की जांच करेंगे और मामले की सत्यता की जांच करेंगें । दोषी लोगों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। ऐसी परिस्थितियां कैसे बनी, इसके बारे में हमें जानना होगा इसके बाद ही हम कुछ कह पाएंगें।"

ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट

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