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राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए तेज प्रताप यादव, प्रदान की 11 लाख रुपये की सहायता

 Edited By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Feb 10, 2026 04:05 pm IST,  Updated : Feb 10, 2026 04:24 pm IST

राजपाल यादव की सहायता के लिए तेज प्रताप यादव आगे आए हैं। तेज प्रताप यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने राजपाल यादव के दुख की घड़ी में 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दे रहे हैं।

राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए तेज प्रताप यादव।- India TV Hindi
राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए तेज प्रताप यादव। Image Source : X/TEJYADAV14/ANI

पटना: एक्टर राजपाल यादव ने कुछ दिन पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। उनपर बकाया राशि न चुका पाने को लेकर मुकदमा चल रहा था, जिसमें राजपाल यादव को सजा भी सुनाई गई थी। बकाया राशि न चुका पाने को लेकर कोर्ट ने राजपाल यादव को सरेंडर करने के लिए कहा था। बता दें कि राजपाल यादव पर 9 करोड़ रुपये का बकाया है, जो उन्होंने एक फिल्म के लिए उधार लिए थे। फिलहाल फिल्म इंडस्ट्री से सोनू सूद की मदद के बाद अब जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने भी राजपाल यादव की मदद करने का ऐलान किया है।   

तेज प्रताप ने किया मदद का ऐलान

सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर तेज प्रताप यादव ने एक पोस्ट में राजपाल यादव की ममद की बात कही। तेज प्रताप यादव ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, "मुझे अभी मेरे बड़े भाई राव इंदरजीत यादव जी की पोस्ट के माध्यम से माननीय राजपाल यादव जी के परिवार की पीड़ा के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। इस अत्यंत कठिन समय में मैं और मेरा पूरा JJD (जनशक्ति जनता दल) परिवार, उनके शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना और मजबूती से खड़ा है। मानवीय करुणा एवं सहयोग की भावना से, मैं JJD परिवार की ओर से ₹11,00,000 (ग्यारह लाख रुपये) की आर्थिक सहायता उनके परिवार को प्रदान कर रहा हूं।"

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, राजपाल यादव की कानूनी परेशानियों की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब उन्होंने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' (2012) के लिए दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का लोन लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके चलते भुगतान नहीं हो सका और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। 

6 महीने की जेल की सजा

शिकायतकर्ता को दिए गए सात चेक बाउंस होने के बाद एक्टर को छह महीने की साधारण जेल की सजा सुनाई गई, जिसे 2019 की शुरुआत में सेशन कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट में रिवीजन पिटीशन दायर की गई, लेकिन समय के साथ उनकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं। जून 2024 में कोर्ट ने सजा को अस्थायी रूप से सस्पेंड करते हुए बकाया रकम चुकाने के लिए “ईमानदारी और ठोस कदम” उठाने का निर्देश दिया, जो बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। हालांकि लगातार डेडलाइन मिस होने और वादे पूरे न होने के चलते कोर्ट का रुख सख्त होता गया।

क्यों सुनाई गई सजा?

अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ने दो डिमांड ड्राफ्ट के जरिए ₹75 लाख जमा किए, लेकिन कोर्ट ने पाया कि ज्यादातर रकम अब भी बकाया थी। इसी महीने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह कहते हुए सरेंडर का आदेश दिया कि किसी के साथ, चाहे उसका सेलिब्रिटी स्टेटस कुछ भी हो, हमेशा नरमी नहीं बरती जा सकती। 4 फरवरी 2026 को कोर्ट ने फंड जुटाने के लिए एक हफ्ते की मोहलत मांगने वाली आखिरी मिनट की याचिका खारिज कर दी। जज ने कहा कि राजपाल यादव पहले भी लगभग 20 बार अपने कमिटमेंट पूरे करने में नाकाम रहे हैं। अगले दिन 5 फरवरी 2026 को उनके वकील द्वारा ₹25 लाख का नया चेक और नया पेमेंट शेड्यूल पेश किए जाने के बावजूद कोर्ट ने सरेंडर ऑर्डर वापस लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसी दिन शाम करीब 4 बजे राजपाल यादव ने अपनी छह महीने की सजा काटने के लिए तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।

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