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कर्नल, मेजर और डीएसपी की शहादत के पीछे है ये आतंकी संगठन, जानें इसकी पूरी कुंडली

 Written By: Avinash Rai
 Published : Sep 14, 2023 11:43 am IST,  Updated : Sep 14, 2023 11:43 am IST

अनंतनाग में सर्च ऑपरेशन कर रहे सुरक्षाबलों पर आतंकियों ने फायरिंग कर दी। इस घटना में कर्नल, मेजर और जम्मू कश्मीर पुलिस के एक डीएसपी शहीद हो गए हैं। इस घटना की जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली है। आईए आपको इस आतंकी संगठन के बारे में बताते हैं।

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आतंकी हमले में शहीद हुए जवान Image Source : INDIA TV

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में सेना और आतंकियों के बीच हुए मुठभेड़ में 3 जवान शहीद हो गए हैं। इन जवानों में कर्नल, मेजर रैंक के अधिकारी समेत जम्मू कश्मीर पुलिस के एक डीएसपी भी शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि आतंकी पहले से ही फिराक में थे। जैसे ही सर्च ऑपरेशन करने के लिए सेना और पुलिस की टीम वहां पहुंची तो आतंकियों ने हमला कर दिया। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयब्बा के रिक्रूटर कहे जाने वाले टीआरएफ यानी द रजिस्टेंस फ्रंट ने ली है। टीआरएफ क्या है, इसने पहले किन हमलों को अंजाम दिया है या फिर इसका काम क्या है, यह आपको हम इस लेख में बताने वाले हैं। 

लश्कर ए तैयब्बा का मोहरा है यह संगठन

द रजिस्टेंस फ्रंट यानी टीआरएफ पहली बार 2019 में वजूद में आया। इस संगठन का काम युवाओं को बहकाने और आतंकी गतिविधियों में शामिल कर आतंकवाद को बढ़ावा देना है। एक प्रकार से कहें तो यह आतंकी संगठन लश्कर ए तैयब्बा का एक मोहरा है। पाकिस्तान से आमतौर पर होने वाली घुसपैठ, हथियार और ड्रग्स की तस्करी के लिए टीआरएफ को ही जिम्मेदार माना जाता है। इस आतंकी संगठन को इन तस्करियों में संलिप्त पाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा इसी साल टीआरएफ को बैन कर दिया गया था। जानकारी के मुताबिक इस ग्रुप का कमांडर शेख सज्जाद गुल है, जो की एक कुख्यात आतंकी है और जम्मू कश्मीर में कई टारगेट किलिंग्स में शामिल रहा है।

क्यों बनाया गया टीआरएफ

5 अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाया गया, तब से सरकार लगातार जम्मू-कश्मीर में शांति लाने के प्रयास कर रही है। सरकार इस चीज में सफल भी हो चुकी है। लेकिन जब धारा 370 को हटाया गया था, उस दौरान हमलों और तनाव जैसे माहौल बने हुए थे। कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाने के बाद टीआरएफ को बनाया गया। टीआरएफ ने टेलीग्राम ऐप के जरिए अपने अस्तित्व का पहली बार ऐलान किया था, जब उसने 12 अक्टूबर 2019 को श्रीनगर के लाल चौक पर ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 8 लोग घायल हुए थे। टीआरएफ के अस्तित्व में आने को लेकर कहा गया कि यह कश्मीर में आतंकवाद की नई स्वदेशी लहर की शुरुआत है। 

ISI और पाकिस्तान का क्या है प्लान

पाकिस्तान को फिलहाल फाइनेंशियस एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में डाला गया है, जिससे निकल पाना पाकिस्तान के लिए ना के बराबर है। ऐसे में पाकिस्तानी फौज ने नए संगठनों का निर्माण किया जिसके जरिए आतंकवाद को आउटसोर्स किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय दबाव और बदनाम छवि के कारण आईएसआई को ये निर्णय लेना पड़ा। यही कारण है कि टीआरएफ जैसे नए आतंकवादी संगठनों को खड़ा किया गया, ताकि थर्ड पार्टी के जरिए आतंकी गतिविधियों को अंजाम देकर पाकिस्तान का नाम ग्रे लिस्ट से बाहर निकाला जा सके। हालांकि हकीकत ये है कि आईएसआई ने टीआरएफ को नई और अलग तरह की रणनीति के तहत बनाया है। टीआरएफ अन्य आतंकी संगठनों से बिल्कुल अलग है। 

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