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यूपी: 5000 सरकारी स्कूल बंद कराने के पक्ष में हाईकोर्ट, आप सांसद बोले- 'शिक्षा के अधिकार की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे'

Edited By: Shakti Singh Published : Jul 07, 2025 06:44 pm IST, Updated : Jul 07, 2025 06:44 pm IST

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों को मर्ज करने का फैसला किया है। हाईकोर्ट ने भी इस फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। ऐसे में वह सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।

Sanjay singh on UP School merger- India TV Hindi
Image Source : PTI यूपी में स्कूल मर्जर के मुद्दे को संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट ले जाने की बात कही है

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों को मर्ज करने का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है। संजय सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि वह शिक्षा के अधिकार की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। यूपी सरकार ने 5000 स्कूलों को मर्ज करने का फैसला किया है। इन सभी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है। कई स्कूलों में तो एक भी छात्र नहीं है। ऐसे में सरकार इन स्कूलों को दूसरे स्कूल के साथ मर्ज करना चाहती है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

सरकार के फैसले का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि इससे छोटे बच्चों के स्कूल उनके घर से दूर हो जाएंगे। इससे उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी होगी। सरकार के फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका में जोर देकर कहा गया था कि स्कूलों का मर्जर 6-14 साल के बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।

संजय सिंह ने क्या लिखा?

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा "हाईकोर्ट के फैसले से हैरान हूं। उत्तर प्रदेश के बच्चों ने जज साहेब से पढ़ाई बचाने की गुहार लगाई थी, सरकार ने स्कूल छीना, अब न्यायालय ने उम्मीद। क्या यही है ‘शिक्षा का अधिकार’? लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट ले जायेंगे।"

क्या है मामला?

उत्तर प्रदेश सरकार ने 16 जून, 2025 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि जिन प्राथमिक स्कूलों में कम बच्चे पढ़ते हैं। उन्हें पास के उच्च प्राथमिक स्कूल में समायोजित कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है और इन स्कूलों के पास ही दूसरे सरकारी स्कूल हैं, जिनके साथ इन स्कूलों को मर्ज किया जा सकता है। सरकार ने 18 ऐसे स्कूलों के बारे में भी बताया है, जहां कोई छात्र नहीं है। सरकार का कहना है कि स्कूलों को मर्ज करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। 5000 स्कूलों के शिक्षक दूसरे स्कूलों में सेवाएं दे सकेंगे। इससे स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ेगी और छात्रों को फायदा होगा।

सीतापुर और पीलीभीत से दायर हुई थी याचिकाएं

सरकार के फैसले के खिलाफ सीतापुर के 51 बच्चों ने और पीलीभीत के बच्चों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में स्कूलों का मर्जर रोकने की अपील की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने 6-14 साल के बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार के उल्लंघन की बात कही थी। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने की बात कही जा रही है।

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