आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने वन अतिक्रमण से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। उनका दावा है कि जंगल की 76.74 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इस मामले पर उन्होंने पूर्व वन मंत्री और वरिष्ठ वाईएसआरसीपी नेता पेड्डीरेड्डी रामचंद्र रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि पूर्वी घाट के मंगलमपेटा रिजर्व फॉरेस्ट में जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। यह जमीन कथित तौर पर पूर्व वन मंत्री और वरिष्ठ वाईएसआरसीपी नेता पेड्डीरेड्डी रामचंद्र रेड्डी से जुड़ी है।
इस साल जनवरी के महीने में वन भूमि अतिक्रमण के आरोप लगे थे। इसके बाद राज्य सरकार ने विस्तृत संयुक्त निरीक्षण के लिए तुरंत एक उच्च-स्तरीय तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया। वन, राजस्व और भूमि अभिलेख विभागों के कई संयुक्त सर्वेक्षणों से अब स्पष्ट, दस्तावेज आधारित उल्लंघन सामने आए हैं।
1. 1968 के राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, केवल 75.74 एकड़ भूमि पर खेती की अनुमति थी। हालांकि, पेड्डीरेड्डी के परिवार से जुड़ी जमीन को 103.98 एकड़ के एक ही ब्लॉक में बाड़ लगाकर घेर दिया गया, जिससे 32.63 एकड़ आरक्षित वन भूमि अवैध रूप से समाहित हो गई। 26 में से 15 वन सीमा के पत्थर उनकी निजी बाड़ के अंदर पाए गए, जो जानबूझकर किए गए अतिक्रमण का पुख्ता सबूत है।
2. वन भूमि को अवैध रूप से निजी संपत्ति में परिवर्तित किया गया। चार पट्टादारों की जमीन को एक ही सीमा बाड़ लगाकर वन भूमि में मिला दिया गया। अतिक्रमित वन क्षेत्र का उपयोग बागवानी के लिए किया जा रहा था, जो आंध्र प्रदेश वन अधिनियम, 1967 के तहत दंडनीय अपराध है।
3. आरक्षित वन के अंदर एक बोरवेल खोदा गया और अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि में पानी की आपूर्ति की गई। यह वन संसाधनों का दुरुपयोग और आपराधिक उल्लंघन है।
4. वन संरक्षण एवं संवर्धन नियम 2023 के वैज्ञानिक आकलन के अनुसार ₹1,26,52,750 वन क्षति का अनुमान है।
5. बीएनएसएस की धारा 94 के तहत 14 मई 2025 को जारी नोटिस में अभियुक्तों से भूमि स्वामित्व संबंधी अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया। अतिक्रमण को वैध बनाने वाले कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
6. 28 मई 2025 तक राजपत्र के अनुसार सीमा स्तंभों का पुनर्निर्माण किया गया और 32.63 एकड़ भूमि आधिकारिक रूप से वापस ले ली गई। अतिक्रमित भूमि पर लगे 560 पेड़ (533 आम, 26 नेरेडू, 1 नारियल) जब्त कर लिए गए।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हवाई सर्वेक्षण और क्षेत्रीय रिपोर्टों की समीक्षा के बाद स्वयं अतिक्रमित क्षेत्र का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को जानकारी दी और कई कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने सभी वन भूमि अतिक्रमणकारियों के नाम सरकारी वेबसाइट पर प्रकाशित करने को कहा और अतिक्रमण की सीमा और प्रत्येक व्यक्ति के मामले की स्थिति सार्वजनिक रूप से प्रकट करने की बात कही।
डिप्टी सीएम ने सभी वन भूमि हड़पने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई वेबलैंड प्रविष्टियों और झूठे "पैतृक भूमि" दावों की जांच के निर्देश दिए। पवन कल्याण ने कहा कि वन भूमि राष्ट्रीय संपत्ति है, और किसी भी व्यक्ति को चाहे वह किसी भी राजनीतिक पद पर हो संरक्षित वनों का उल्लंघन या विनाश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने सतर्कता रिपोर्टों पर सख्ती से कार्रवाई करने और हेरफेर रोकने के लिए भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण करने के निर्देश दिए।
29 जनवरी 2025 - मीडिया में आने के बाद सरकार ने समिति गठित की
31 जनवरी - 10 फरवरी 2025 - संयुक्त सर्वेक्षणों में 32.63 एकड़ अतिक्रमण की पुष्टि हुई
03 मार्च 2025 - बेदखली के निर्देश जारी
11 मार्च 2025 - बेदखली के नोटिस जारी
30 अप्रैल 2025 - वन क्षति का आकलन ₹1.26 करोड़ किया गया
04 मई 2025 - आपराधिक मामला दर्ज
14 मई 2025 - दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस → कोई प्रतिक्रिया नहीं
28 मई 2025 - वन सीमा स्तंभों का पुनर्निर्माण; भूमि पुनः प्राप्त
03 सितंबर 2025 - अभियोजन और जब्ती के आदेश जारी
इस मामले में एक पूर्व वन मंत्री और एक वरिष्ठ वाईएसआरसीपी नेता पर एक संरक्षित पूर्वी घाट आरक्षित वन, आंध्र प्रदेश वन अधिनियम, 1967, बीएनएस और वन संरक्षण नियम, 2023 का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं। राज्य सरकार की निर्णायक कार्रवाई और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के हस्तक्षेप से यह मामला तेजी से अभियोजन की ओर बढ़ने की उम्मीद है।
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