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बोट छोड़ सड़क पर उतरीं प्रियंका गांधी, प्रोटोकाल तोड़कर गोपीगंज में किया रोड शो

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Mar 19, 2019 08:43 am IST, Updated : Mar 19, 2019 01:48 pm IST

प्रियंका का सफर कल वाराणसी में खत्म होगा जहां वो काशी विश्वनाथ मंदिर में भी हाजिरी लगाएंगी लेकिन प्रियंका के काशी पहुंचने से पहले ही उन्हें ईसाई बताकर काशी-विश्वनाथ मंदिर में उनकी एंट्री का विरोध शुरू हो गया है।

प्रियंका गांधी की बोट यात्रा का आज दूसरा दिन, वाराणसी पहुंचने से पहले काशी विश्वनाथ में प्रवेश पर वि- India TV Hindi
प्रियंका गांधी की बोट यात्रा का आज दूसरा दिन, वाराणसी पहुंचने से पहले काशी विश्वनाथ में प्रवेश पर विवाद

नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की बोट यात्रा का आज दूसरा दिन है। अपने दूसरे दिन की यात्रा की शुरुआत प्रियंका ने भदोही जिले के सीता मंदिर में पूजा अर्चना से की। यहां प्रियंका ने मां सीता की खास पूजा अर्चना की और जीत का आशीर्वाद मांगी। दर्शन से पहले प्रियंका ने मोदी और योगी पर निशाना साधा। मोदी सरकार से पांच साल के कामकाज का हिसाब मांगा और कहा कि 70 साल के रट की भी एक्सपायरी डेट होती है। वहीं वो गंगा यात्रा के मुकाबले सड़क मार्ग से जनता में पैठ बनाने में जुट गईं और प्रोटोकाल तोड़कर गोपीगंज में रोड शो किया।

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प्रियंका आज मिर्जापुर में विंध्य धाम और मौलाना इस्‍माइल चिश्ती की दरगाह पर मत्था टेकेंगी। इससे पहले प्रियंका ने कल भी प्रयागराज में बड़े हनुमान समेत कई धार्मिक स्थलों पर गईं। प्रियंका का सफर कल वाराणसी में खत्म होगा जहां वो काशी विश्वनाथ मंदिर में भी हाजिरी लगाएंगी लेकिन प्रियंका के काशी पहुंचने से पहले ही उन्हें ईसाई बताकर काशी-विश्वनाथ मंदिर में उनकी एंट्री का विरोध शुरू हो गया है। संतों के साथ वकीलों ने भी प्रियंका गांधी के काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश का विरोध किया है।

प्रियंका गांधी को वाराणसी पहुंच कर काशी विश्वनाथ मंदिर में मत्था टेकना है लेकिन उससे पहले काशी के वकीलों और संतों ने प्रियंका के काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश का विरोध कर दिया है। वकीलों और संतों का कहना है कि प्रियंका गांधी वाड्रा ईसाई हैं। उनकी पूजा की जगह चर्च है। ऐसे में सनातन धर्म के मूल्यों की खातिर प्रियंका को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। काशी के वकीलों ने इसके लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम डीएम को चिट्ठी भी सौंपी है। 

हालांकि, इससे पहले बोट यात्रा के पहले दिन प्रियंका ने प्रयागराज में बड़े हनुमान जी के मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों पर पूजा-पाठ किया। जाहिर है मकसद वोट बैंक को साधना है। लिहाजा, प्रियंका गांधी वाड्रा मौका मिलते ही धर्म के साथ-साथ सियासी कर्म को भी निभा रही हैं। अपने सबसे बड़े सियासी दुश्मन नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रही हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा के मुताबिक देश संकट में है लेकिन बीजेपी कह रही है कि प्रियंका की पार्टी, परिवार, भाई, पति और संपत्ति संकट में है जिन्हें बचाने के लिए चुनाव से ऐन पहले प्रियंका को सियासी मैदान में उतरना पड़ा है। 

इसमें कोई शक नहीं कि गंगा यात्रा के जरिए प्रियंका गांधी बेजान होती कांग्रेस में नई जान फूंकने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व को चुनौती देने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में बोट यात्रा का कारवां जहां भी रुक रहा है निशाने पर नरेंद्र मोदी ही होते हैं। जाहिर है पूर्वी यूपी की प्रभारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका के कंधों पर जिम्मेदारी बहुत बड़ी है क्योंकि चुनावी नतीजों में ब्रांड प्रियंका बेअसर रहा तो कांग्रेस के तुरुप का आखिरी पत्ता भी नाकाम होने का खतरा है।

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