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कर्नाटक में सीनियर मंत्रियों को किनारे लगाएगी कांग्रेस? 'कामराज प्लान' को लागू करने की हो रही तैयारी

 Reported By: Vijai Laxmi Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Oct 22, 2025 06:16 pm IST,  Updated : Oct 22, 2025 06:19 pm IST

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी कामराज प्लान लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत कई सीनियर मंत्रियों को कैबिनेट से हटाकर संगठन में शिफ्ट किया जा सकता है। ऐसे में डीके शिवकुमार को अपनी एक पोस्ट छोड़नी पड़ सकती है।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार। Image Source : PTI

बेंगलुरु: कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी एक बड़े बदलाव की तैयारी में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी जल्द ही कामराज प्लान को लागू करने जा रही है, जिसके तहत कई सीनियर चेहरे कैबिनेट से हटाए जाएंगे। कुछ मंत्रियों पर परफॉर्मेंस की कमी का इल्जाम है, तो कुछ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इस फेरबदल में करीब दर्जन भर सीनियर कैबिनेट मंत्री बाहर हो सकते हैं। इन्हें पार्टी संगठन में शिफ्ट किया जाएगा, ताकि नए चेहरों को कैबिनेट में जगह मिल सके। यह फेरबदल साल के अंत तक होने की संभावना है।

डीके शिवकुमार को देनी होगी कुर्बानी?

कर्नाटक सरकार को अपनी 2.5 साल की कारगर का मुद्दा पूरा हो चुका है। इसी बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार लगातार रोटेशनल चीफ मिनिस्टरशिप की मांग कर रहे हैं। लेकिन अगर कामराज प्लान अमल में आया, तो उन्हें अपनी एक-दो पोस्ट छोड़नी पड़ सकती है। वर्तमान में वे राज्य कांग्रेस अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री और डिप्टी सीएम तीनों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पार्टी हाईकमान को लगता है कि सीनियर लीडर्स को संगठन पर फोकस करने का मौका मिलना चाहिए, ताकि ग्रासरूट लेवल पर पार्टी मजबूत हो।

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Image Source : PTIकर्नाटक से डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के खेमों के बीच खींचतान की खबरें आती रहती हैं।

क्या है कामराज प्लान और इसका इतिहास?

यह प्लान कोई नई स्कीम नहीं है, बल्कि इसका इतिहास 1963 तक जाता है। तत्कालीन मद्रास और आज के तमिलनाडु के चीफ मिनिस्टर के. कामराज ने इसे पेश किया था। कामराज बाद में कांग्रेस के प्रेसिडेंट भी बने। उस दौर में 1962 में चीन और भारत में हुई जंग के बाद कांग्रेस पार्टी कमजोर पड़ रही थी, सीनियर लीडर्स सरकारी दफ्तरों में उलझे हुए थे और पार्टी के जमीनी स्तर पर कामकाज ठप हो चुका था। कामराज ने प्रस्ताव दिया कि सीनियर कांग्रेस लीडर्स अपनी सरकारी पोस्ट छोड़ दें और पार्टी को फिर से मजबूत बनाने पर लगें। इसका मकसद था पार्टी को नई ऊर्जा देना।

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Image Source : PTIलाल बहादुर शास्त्री, के. कामराज और जवाहर लाल नेहरू।

इस प्लान के तहत लाल बहादुर शास्त्री, जगजीवन राम और मोरारजी देसाई समेत 6 केंद्रीय मंत्रियों और कामराज सहित 6 मुख्यमंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। इन 'फ्रीड फ्रॉम ऑफिस फॉर पार्टी' लीडर्स ने ग्रासरूट लेवल पर पार्टी को फिर से संगठित किया। कामराज खुद कांग्रेस प्रेसिडेंट बने। इस प्लान ने कांग्रेस को नई जान फूंकी और नेहरू के बाद शास्त्री व इंदिरा गांधी जैसे लीडर्स को आगे बढ़ाने में मदद की।

कामराज प्लान से कांग्रेस को क्या फायदा हुआ?

यह प्लान पार्टी को साफ-सुथरा और एकजुट बनाने का हथियार साबित हुआ। सीनियर लीडर्स ने संगठन को मजबूत किया, जबकि नए चेहरे सरकार चला सके। नतीजतन, पार्टी की पकड़ मजबूत हुई और बाद में हुए चुनावों में कांग्रेस ने अच्छी सफलता हासिल की। आज भी यह प्लान पार्टी के लिए एक मॉडल है, खासकर जब सरकार में ठहराव आ जाए। कर्नाटक में कांग्रेस को 2023 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत मिली थी, लेकिन अब पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है।

कर्नाटक में क्यों इसे लागू करना चाहती है कांग्रेस?

सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक में कांग्रेस कामराज प्लान को लागू करके सरकार को तरोताजा करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार के आरोपों से निपटना चाहती है और संगठन को मजबूत बनाना चाहती है। ऐसा माना जा रहा है कि इस कदम से जनता में असंतोष कम होगा और आने वाले चुनावों में इससे फायदा मिल सकता है। हालांकि अगर कांग्रेस इस प्ला्न पर आगे बढ़ती है तो डीके शिवकुमार की स्थिति पर असर पड़ सकता है। अब ऐसे में इस तरह का कदम पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, या फिर आंतरिक कलह बढ़ाएगा, इसका जवाब तो आने वाला वक्त ही देगा।

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