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महाकुंभ 2019: प्रयागराज में पहली बार निकली किन्नर अखाड़े की देवत्व यात्रा, देखिए खास तस्‍वीरें

मकर संक्रांति से यहां प्रारंभ होने जा रहे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के लिए रविवार को इस नगर में पहली बार किन्नर अखाड़े की देवत्व यात्रा निकली। किन्नर साधु संतों का दर्शन करने के लिए लाखों की तादाद में लोग एकत्रित हुए।

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Jan 06, 2019 02:15 pm IST, Updated : Jan 06, 2019 02:15 pm IST
Devavrat Yatra- India TV Hindi
Image Source : PTI Devavrat Yatra
मकर संक्रांति से यहां प्रारंभ होने जा रहे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के लिए रविवार को इस नगर में पहली बार किन्नर अखाड़े की देवत्व यात्रा निकली। किन्नर साधु संतों का दर्शन करने के लिए लाखों की तादाद में लोग एकत्रित हुए।
 
राम भवन चौराहे से निकली इस देवत्व यात्रा की खास बात यह रही कि इसमें किन्नर संत घोड़ों और बग्घियों पर सवार थे, जबकि बाकी अखाड़ों की यात्रा में ट्रैक्टर ट्राली पर रखे सोने-चांदी के हौदों पर साधु-संत विराजमान थे। इस देवत्व यात्रा में 25 से अधिक बग्घियां थीं। वहीं दूसरी ओर, घोड़े गीत-संगीत की धुन पर थिरकते हुए बच्चों का मनोरंजन कर रहे थे। 
 
यद्यपि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने किन्नर अखाड़ा को मान्यता नहीं दी है। लेकिन किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बीच नगर में देवत्व यात्रा निकाली जिससे यह सभी के आकर्षण का केंद्र बनी। 
 
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किन्नर अखाड़े के सतपुत्र अनुराग शुक्ला ने पीटीआई भाषा को बताया, “किन्नर अखाड़ा उज्जैन कुम्भ के बाद प्रयागराज में अपनी देवत्व यात्रा निकाल रहा है और चूंकि प्रयागराज में किन्नर अखाड़ा पहली बार देवत्व यात्रा निकाल रहा है, इसलिए लोगों में इसको लेकर खासी उत्सुकता रही है।” 
 
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Image Source : PTI
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किन्नर अखाड़े की इस देवत्व यात्रा में सबसे आगे आठ बग्घियों पर अखाड़े के संत विराजमान थे और इसके पीछे अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ऊंट पर सवार थीं और लोगों को आशीर्वाद दे रही थीं। इनके पीछे एक वाहन में अखाड़े के आराध्य देवता महाकालेश्वर विराजमान थे। देवत्व यात्रा में आराध्य देवता के पीछे बाजे-गाजे और झांकियों के साथ बग्घियों पर किन्नर साधु संत सवार थे और लोगों को आशीर्वाद दे रहे थे। किन्नर संतों ने सुंदर साड़ियां पहन रखी थीं और खूब श्रृंगार कर रखा था जिससे उनकी यह यात्रा एक अलग ही छठा बिखेर रही थी।

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