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'लैंड फॉर जॉब घोटाला' मामले में लालू फैमिली को झटका, कोर्ट में पूरे परिवार पर तय हुए आरोप

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jan 09, 2026 10:46 am IST,  Updated : Jan 09, 2026 11:56 am IST

लैंड फॉर जॉब स्कैम मामले में लालू फैमिली की परेशानी बढ़ गई है। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी समेत परिवार के कई सदस्यों पर आरोप तय कर दिए हैं।

जमीन के बदले नौकरी...- India TV Hindi
जमीन के बदले नौकरी घोटाला मामले में लालू परिवार पर आरोप तय हो गए हैं। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की फैमिली को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट में लालू के पूरे परिवार पर आरोप तय हो गए हैं। परिवार के मुखिया लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती पर आरोप तय कर दिए गए हैं। इसके अलावा, बेटे तेज प्रताप, बेटे तेजस्वी और बेटी हेमा के खिलाफ भी आरोप तय हो गए हैं। ये भी जान लें कि लैंड फॉर जॉब मामले में कुल 98 आरोपियों में से 52 लोगों को कोर्ट ने आरोप मुक्त भी किया है।

लैंड फॉर जॉब घोटाला क्या है?

बता दें कि लैंड फॉर जॉब घोटाला, कथित भ्रष्टाचार का केस है। यह साल 2004 से 2009 के बीच हुआ, जब लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि लालू यादव ने अपने रेल मंत्री के पद का गलत इस्तेमाल किया और इसके जरिए रेलवे के 'ग्रुप-डी' के पदों पर नियुक्तियां की। इन नियुक्तियों के बदले उन्होंने और उनके परिवार ने उम्मीदवारों से रियायती दरों पर या गिफ्ट के तौर पर जमीनें हासिल की थीं।

98 आरोपियों में लालू परिवार का कौन-कौन शामिल?

जांच के दौरान, इस केस में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेज प्रताप यादव, बेटे तेजस्वी यादव, बेटियां मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 98 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें अब लालू परिवार को सदस्यों पर आरोप तय हो गए हैं, जबकि 52 लोगों को आरोप मुक्त किया जा चुका है।

लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है?

लैंड फॉर जॉब स्कैम केस में आरोप तय होने के बाद लालू परिवार के सदस्यों की संभावित सजा पर बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने INDIA TV से बताया, 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 8, 9, 11, 12 और 13, ये सभी लगे हुए हैं। इन सभी में 7 साल तक की सजा का प्रावधान का है। वहीं, धारा 467, 468 और 471 भी हैं तो कुल मिलाकर इनको अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है, अगर सारी सजाएं एक साथ चलती हैं। लेकिन सजा अगर एक के बाद एक शुरू करने वाला कोई ऑर्डर अदालत देती है तो इसमें ये सजा बढ़ भी सकती है।'

अलग-अलग सजा को लेकर प्रावधान क्या है?

उन्होंने आगे कहा, 'अदालत जब आदेश देती है, तो कहती है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, तो उसमें जो अपर साइड सजा होती है, वही सजा दोषी को भुगतनी पड़ती है। यानी अधिकतम जितने साल की सजा कोर्ट की तरफ से सुनाई जाती है, उतने साल ही दोषी को जेल में रहना पड़ता है।'

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