मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समनापुर से स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां वर्षों से फर्जी तरीके से ड्यूटी कराई जा रही है। एक कर्मचारी की जगह उसकी बेटी काम कर रही है और वेतन कर्मचारी के नाम से निकाला जा रहा है। मामला सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला डिंडौरी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र समनापुर का है। यहां पदस्थ कर्मचारी द्रोपती मरावी के स्थान पर उनकी बेटी ममता मरावी पिछले कई वर्षों से अनधिकृत रूप से ड्यूटी कर रही है। जानकारी के अनुसार, द्रोपती मरावी पिछले लगभग सात वर्षों से लकवाग्रस्त हैं और शारीरिक रूप से काम करने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद उनकी जगह उनकी बेटी नियमित रूप से स्वास्थ्य केंद्र में कार्य करती रही।
मां के नाम से किए जा रहे हस्ताक्षर
हैरानी की बात यह है कि उपस्थिति पंजी में भी मां के नाम से हस्ताक्षर किए जा रहे हैं और उसी आधार पर हर महीने वेतन का भुगतान किया जा रहा है। यह पूरा मामला बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा। इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों तक यह फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे क्यों बैठे रहे?
बहरहाल, मामला सामने आने के बाद अब सभी की नजरें जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिम्मेदारों पर कब और क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
(रिपोर्ट- दीपक कुमार नामदेव)
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