होली का त्योहार रंगों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से भरा होता है। जैसे-जैसे होलिका दहन की रात करीब आती है, घरों में उत्साह और तैयारियों की रौनक बढ़ जाती है। इन्हीं तैयारियों के बीच कई राज्यों और खासतौर पर उत्तर भारत के कुछ इलाकों में होली से एक दिन पहले बुकवा लगाने की परंपरा निभाई जाती है। बुकवा, दरअसल एक खास तरह का उबटन होता है, जिसे बेसन, हल्दी, सरसों का तेल, मिलाकर बनाया जाता है। यह परंपरा सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि इसके पीछे त्वचा की देखभाल और स्वास्थ्य से जुड़े कई कारण भी छिपे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर होली से पहले बुकवा क्यों लगाया जाता है और इससे क्या-क्या फायदे मिलते हैं।
होली से एक दिन पहले शरीर पर बुकवा लगाना शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि इससे शरीर की नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियां होलिका की अग्नि के साथ जलकर नष्ट हो जाती हैं। यह परंपरा सरसों के तेल हल्दी और अन्य लेप से त्वचा को डिटॉक्स करने और संक्रमण से बचाने का भी काम करती है। उबटन लगाने से त्वचा के रोमछिद्र खुलते हैं और शरीर की अशुद्धियां बाहर निकलती हैं।
होली में इस्तेमाल होने वाले रंग कई बार केमिकल वाले होते हैं। बुकवा लगाने से त्वचा पर एक प्राकृतिक परत बन जाती है, जिससे रंगों का असर कम पड़ता है। हल्दी और बेसन त्वचा की गंदगी साफ करते हैं, डेड स्किन हटाते हैं और स्किन को चमकदार बनाते हैं। सरसों का तेल और हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो त्वचा को संक्रमण और एलर्जी से बचाने में मदद करते हैं।
होली पर असरदार उबटन बनाने के लिए, 2 बड़े चम्मच बेसन, 2-3 चुटकी हल्दी, 2 बड़े चम्मच दही या कच्चा दूध, और सरसों के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे लगाएं, 15-20 मिनट तक सूखने दें, फिर रंग हटाने और स्किन को बचाने के लिए इसे हल्के हाथों से रगड़कर हटा दें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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