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नाग पंचमी पर मिलेगी कालसर्प दोष और सर्प दंश से मुक्ति, बस ऐसे करें नाग देवता की पूजा

Written by: India TV Lifestyle Desk
Published : Jul 24, 2020 08:10 pm IST, Updated : Jul 24, 2020 10:18 pm IST

नाग पंचमी के दिन सर्प दंश से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये आपको किस प्रकार नागों की पूजा करनी चाहिए। जानिए आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में।

नाग पंचमी पर मिलेगी कालसर्प दोष और सर्प दंश से मुक्ति, बस ऐसे करें नाग देवता की पूजा- India TV Hindi
Image Source : INSTAGRAM/RUDRA_CENTRE नाग पंचमी पर मिलेगी कालसर्प दोष और सर्प दंश से मुक्ति, बस ऐसे करें नाग देवता की पूजा

श्रावण शुक्ल पक्ष की उदया तिथि पंचमी और शनिवार का दिन है। हर वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाने का विधान है। लिहाजा शनिवार को नागपंचमी है। नागपंचमी श्रावण के महीने में पड़ने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने का विधान है। नागपंचमी का ये त्योहार सर्प दंश के भय से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये, राहू कृत पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए, मनाया जाता है। 

अगर आपको भी इस तरह का कोई भय है या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है या आप राहू से पीड़ित हैं,  तो उससे छुटकारा पाने के लिये आज के दिन आपको इन आठ नागों की पूजा करनी चाहिए । 

  1. वासुकि
  2. तक्षक
  3. कालिय
  4. मणिभद्र
  5. ऐरावत
  6. धृतराष्ट्र
  7. कर्कोटक
  8. धनंजय|

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आज के दिन सर्प दंश से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये आपको किस प्रकार नागों की पूजा करनी चाहिए। जानिए आचार्य इंदु प्रकाश से इन उपायों के बारे में। 

जानिए कुंडली में कालसर्प दोष है या नहीं

आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार प्रत्येक जन्म पत्रिका में राहु से केतु सातवें खाने में होता है और काल सर्प दोष का मतलब है सारे ग्रहों का राहु और केतु के एक ही तरफ होना। अतः आपकी जन्मपत्रिका में ऐसी स्थिति बन रही है तो आपको आज के दिन नागपंचमी की पूजा जरूर करनी चाहिए, लेकिन यहां आपको एक और बात जरूर बता दें कि अगर आपकी पत्रिका में कालसर्प दोष नहीं है, तब भी आपको आज के दिन दिशाओं के क्रम में नागों की पूजा जरूर करनी चाहिए। क्योंकि राहु तो सभी की जन्मपत्रिका में होता है। अतः कालसर्प दोष हो या न हो, राहु कृत पीड़ा की शान्ति के लिये दिशाओं के सही क्रम में पूजा करना सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा। 

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आज पड़ने वाले ग्रह नक्षत्र और योग

शनिवार दोपहर 2 बजकर 19 मिनट तक उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। सत्ताईस नक्षत्रों की श्रेणी में से उत्तराफाल्गुनी बारहवां नक्षत्र है। इस नक्षत्र के स्वामी स्वयं सूर्यदेव हैं। लिहाजा उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के दौरान सूर्यदेव की उपासना करना भी लाभदायक रहता है। इस दौरान सूर्यदेव की उपासना करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। वनस्पतियों में पाकड़ के पेड़ से इसका संबंध बताया गया है। इसके साथ ही पूरा दिन आधी रात तक शिव योग रहेगा।  यह योग बहुत ही शुभदायक है। इस योग में किए गए सभी मंत्र शुभफलदायक होते हैं। इस योग में यदि प्रभु का नाम लिया जाए तो सफलता मिलती है। 

सर्प दंश और काल सर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए ऐसे करें पूजा

  • नागपंचमी के दिन सर्प दंश से मुक्ति पाने के लिये और कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिये आपको किस प्रकार से और किस दिशा में नागों की पूजा करनी चाहिए। जानिए आचार्य इंदु प्रकाश से।
  • अगर आपकी जन्म कुण्डली में राहु लग्न में है, तो आप अपने घर की पूर्व दिशा में नाग पंचमी की पूजा कीजिये।  लेकिन सबसे पहले वासुकि की पूजा ईशान कोण में कीजिये, फिर तक्षक, फिर कालिय और सबसे अन्त में धनंजय की पूजा कीजिए।
  • अगर आपकी जन्म पत्रिका में राहु दूसरे खाने में है, तो घर की पूर्व दिशा में है।  जहां उत्तरी दिशा से मिलती है। वहां नाग पूजा कीजिए। लेकिन सबसे पहले वासुकि से शुरू कर तक्षक, कालिय, मणिभद्र, ऐरावत, ध्रतराष्ट्र, ककोर्टक और फिर धनंजय की पूजा कीजिए।
  •  यदि राहु आपकी जन्म पत्रिका के तीसरे स्थान पर है तो घर की उत्तरी दिशा। जहां पूर्व दिशा को छूती है, वहां नाग पूजन कीजिये। लेकिन सबसे पहले वासुकि से शुरू करके क्रमश: तक्षक, कालिय, मणिभद्र, ऐरावत, ध्र्तराष्ट्र और ककोर्टक और फिर धनंजय का पूजन करें। 

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  • यदि राहु चौथे घर में हो तो घर की उत्तर दिशा में नाग पूजन करें। सबसे पहले वासुकि, फिर धनंजय, पुन: तक्षक, कालिय, मणिभद्र, ऐरावत, ध्रतराष्ट्र और उसके बाद ककोर्टक का पूजन करें।
  • यदि आपकी जन्म पत्रिका में राहु पांचवें स्थान पर हैं तो घर की उत्तरी दिश। जहां पश्चिम को घूती हो वहां पर नाग पूजन करें।  सबसे पहले वासुकि का, उसके बाद ककोर्टक का पूजन करें, फिर धनंजय, तक्षत्र, कालिय, माणिभद्र, एरावत और आखिर में ध्रतराष्ट्र का पूजन करें।
  • यदि राहु आपकी जन्म पत्रिका के छठें घर में हो, तो घर की पश्चिम दिशा। जहां पर उत्तर दिशा को छूती हो वहां पर नागपूजा करें। सबसे पहले वासुकि, फिर ककोर्टक, फिर धनंजय, फिर तक्षक, कालिय, मणिभद्र व ऐरावत और ध्रतराष्ट्र का पूजन करें। 
  • यदि जन्म पत्रिका के सातवें खाने में राहु हो तो घर की पश्चिम दिशा में नागपूजा करें।  सबसे पहले वासुकि, फिर ध्रतराष्ट्र, ककोर्टक, धनंजय, कालिय, मणिभद्र व ऐरावत का पूजन करें।
  • यदि राहु आपकी जन्म पत्रिका के आठवें खाने में हो तो, घर की पश्चिम दीवार। जहां दक्षिणी दिशा को स्पर्श करती हो वहां पर नागपूजा करनी चाहिए। सबसे पहले वासुकि, फिर ऐरावत, तब ध्रतराष्ट्र, ककोर्टक, धनंजय, तक्षक, कालिय और मणिभद्र का पूजन करना चाहिये।
  • यदि राहु नवें खाने में हो तो दक्षिणी दिशा जहां पश्चिम को छूती हो वहां नागपूजा करें। सबसे पहले वासुकि, फिर ऐरावत, ध्रतराष्ट्र, ककोर्टक, धनंजय, तक्षक, कालिय और मणिभद्र का पूजन करें। 
  • यदि राहु जन्म पत्रिका के दसवें खाने में हो तो दक्षिण दिशा में नागपूजा करें। सबसे पहले वासुकि, फिर मणिभद्र, ऐरावत, ध्रतराष्ट्र, ककोर्टक, धनंजय, तक्षक और फिर कालिय का पूजन करें।
  • यदि आपकी जन्म पत्रिका में राहु एकादश स्थान पर हो तो जहां दक्षिणी दिशा, पूर्वी दिशा को छूती हैं वहां पर नागपूजा करें। सबसे पहले वासुकि और उसके बाद कालिय, मणिभद्र, धर्तराष्ट्र, ककोर्टक, धनंजय और तक्षक की पूजा करें।
  • यदि राहु आपकी जन्म पत्रिका के बारहवें खाने में हो तो आपके घर की पूर्वी दिशा जहां पर दक्षिणी दिशा को छूती हो उस जगह नागपूजा करें। सबसे पहले वासुकि का पूजा करें, फिर कालिय, ऐरावत, धर्तराष्ट्र, ककोर्टक, धनंजय और आखिर में तक्षक की पूजा करें।

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