19 अप्रैल को संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत किया जायेगा। दरअसल, चतुर्थी तिथि में रात के समय चाँद का दर्शन करके पूजा करते हैं, लिहाजा निशिथव्यापिनी चतुर्थी ही ग्राह्य है। यानि जिस दिन चतुर्थी तिथि के साथ रात हो उस दिन चतुर्थी को व्रत रखना चाहिए। चतुर्थी तिथि 20 अप्रैल दोपहर 1 बजकर 52 मिनट तक ही रहेगी। यानि कि- चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय 19 अप्रैल ही होगा।
बता दें कि प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल, दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की पूजा की जाती है। हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी मनायी जाती है, जबकि हर माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी मनायी जाती है।
संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त
संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी व्रत की पूजा विधि
इस मंत्र का जाप करें -
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
या फिर
ॐ श्री गं गणपतये नम: का जाप करें।
अंत में चंद्रमा को दिए हुए मुहूर्त में अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूर्ण करें।
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