Wednesday, February 04, 2026
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कंपकंपाती ठंड में भी खौलता है पहाड़ों में बसे इस गुरूद्वारे का पानी, विदेशों से देखने आते हैं सैलानी, जाने क्या है इसके पीछे की कहानी?

कुल्लू की पार्वती घाटी की गोद में एक ऐसा गुरुद्वारा है जहाँ से खौलते हुए पानी का झरना बहता है जो आज भी लोगों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। चलिए जानते हैं आइए क्यों होता है?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Dec 03, 2025 08:45 pm IST, Updated : Dec 03, 2025 08:45 pm IST
 मणिकरण साहिब- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO मणिकरण साहिब

प्रकृति, अपने विविध रूपों, रहस्यमयी स्थानों और क्रियाओं से मनुष्य जाति को हमेशा प्रभावित करती आई है। इस लेख में आज हम प्रकृति के इसी अजूबे पर चर्चा करेंगे। कुल्लू जिले की सुंदर पार्वती घाटी में बसा मणिकरण गुरुद्वारा सबसे पवित्र जगहों में से एक है। यहां पहुंचते ही आपको कुदरत का एक बेहद खूबसूरत करिश्मा नज़र आएगा। एक तरफ जहां गुरूद्वारे के पास में पार्वती नदी से खौलता हुआ पानी निकलता वहीं बाकी नदी सामान्य रूप से बहती रहती है। ये पवित्र स्थल अपने गर्म पानी के झरनों के लिए सैलानियों के बीच सबसे ज्यादा मशहूर है। चलिए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं और क्या कहता है विज्ञान का तर्क?

मणिकरण साहिब

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मणिकरण साहिब

पार्वती नदी की गोंद में बसा है मणिकरण गुरुद्वारा

पार्वती घाटी में स्थित, मणिकरण गुरुद्वारा धार्मिक आस्था और प्रकृति की खूबसूरती का एक बेजोड़ संगम है। पार्वती नदी के किनारे बना ये गुरुद्वारा वैसे तो सिखों का धार्मिक तीर्थस्थल माना जाता है। लेकिन यहां पर हिंदू धर्म के लोग भी खूब आते हैं। मणिकरण में आप खूबसूरत पहाड़, हसीन वादियां का मजा ले सकते हैं। अगर आप कसोल जाने का प्लान कर रहे हैं तो वहां से आप मणिकरण भी जा सकते हैं। कसोल से वहां की दूरी केवल 4 किमी है।

 मणिकरण साहिब

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मणिकरण साहिब

क्या है मणिकरण साहिब के गर्म पानी की कहानी?

मणिकरण साहिब के गर्म पानी की कहानी गुरु नानक देव जी से जुड़ी हुई है। गुरु नानक देव जी जब अपने शिष्यों के साथ मणिकरण आए थे और उन्होंने लंगर शुरू किया था। लेकिन एक दिन लंगर का भोजन पकाने के लिए आग नहीं थी, इसलिए उन्होंने एक चट्टान उठाने को कहा। जब चट्टान उठाई गई, तो एक गर्म पानी का झरना दिखाई दिया। गुरु नानकजी के कहने पर, जब शिष्यों ने आटे की रोटियाँ उस झरने में डालीं, तो वे डूब गईं। तब गुरु नानक देव जी ने उनसे कहा कि वे "वाहेगुरु" का नाम लेकर फिर से रोटियाँ डालें। जब उन्होंने ऐसा किया, तो जो रोटियाँ पहले डूब गई थीं, वे भी तैरकर ऊपर आ गईं। इस तरह, मणिकरण के गर्म पानी का उपयोग आज भी लंगर में भोजन पकाने के लिए किया जाता है।

 मणिकरण साहिब

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मणिकरण साहिब

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

मणिकरण साहिब के गर्म पानी का वैज्ञानिक कारण भूतापीय गतिविधि है। यह प्रक्रिया पृथ्वी की पपड़ी के भीतर की गर्मी से होती है, जो मैग्मा (पिघली हुई चट्टान) या टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण उत्पन्न होती है। वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि मणिकरण क्षेत्र में काफी गहरी दरारें हैं, जिनसे पानी गहराई में रिसता है। जब भूजल इन गर्म चट्टानों के संपर्क में आता है, तो यह गर्म हो जाता है और गर्म पानी के झरने के रूप में सतह पर आता है।

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