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महाराष्ट्र विधानसभा में धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 पेश, हर गलत रास्ते पर कानून की बेड़ियां

Reported By : Sachin Chaudhary Edited By : Khushbu Rawal Published : Mar 13, 2026 07:00 pm IST, Updated : Mar 13, 2026 07:00 pm IST

महाराष्ट्र विधानसभा में आज धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 पेश किया गया, जिसमें कपटपूर्ण तरीके से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए सख्त प्रावधान शामिल हैं।

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Image Source : PTI महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026 को वर्तमान बजट सत्र के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा में पेश किया गया है। इस बिल का उद्देश्य बल, धोखा, गलत प्रस्तुति, दबाव, अनुचित प्रभाव, विवाह या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से कराए गए धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। यह बिल न केवल अवैध धर्मांतरण को रोकने की कोशिश करता है बल्कि इसमें किए गए प्रावधान इसे अन्य राज्यों के कानूनों की तुलना में अधिक सख्त और व्यापक बनाते हैं।

प्रमुख प्रावधान-

  1. अवैध धर्म परिवर्तन के मामले में एफआईआर परिवर्तित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रिश्तेदार दर्ज करा सकते हैं। पुलिस स्वयं संज्ञान (सुओ मोटू) भी ले सकेगी। सजा- अवैध धर्म परिवर्तन के लिए अधिकतम 7 वर्ष की कैद और 1 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना।
  2. यदि अपराध नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति या सामूहिक धर्म परिवर्तन से जुड़ा हो, तो अधिक कठोर सजा का प्रावधान होगा। बार-बार अपराध करने वालों को अधिकतम 10 वर्ष की कैद और 7 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
  3. किसी संस्था की संलिप्तता पाए जाने पर उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर भी जेल व जुर्माने की कार्रवाई होगी। कानून का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता बंद कर दी जाएगी।

कानूनी प्रक्रिया

  • सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होंगे।
  • जांच सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा की जाएगी।
  • मामलों की सुनवाई सेशन कोर्ट में होगी।

वैध धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया

  • धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी को 60 दिन पूर्व सूचना देनी होगी।
  • 30 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं, जिसके बाद प्रशासन पुलिस जांच करा सकता है।
  • धर्म परिवर्तन के 21 दिनों के भीतर व्यक्ति और आयोजन करने वाली संस्था को घोषणा पत्र जमा करना होगा।
  • निर्धारित समय में घोषणा न देने पर धर्म परिवर्तन अमान्य माना जाएगा।
  • प्रस्तावित कानून में अवैध धर्म परिवर्तन के पीड़ितों के पुनर्वास, भरण-पोषण और बच्चों की अभिरक्षा से संबंधित सुरक्षा प्रावधान भी शामिल हैं।
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