बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार सत्ता के केंद्र में रहा है। अजित पवार के शरद पवार से अलग होने के बाद जहां शरद पवार का राजनीतिक आधार चुनावों में कमजोर नजर आया वहीं अजित पवार काफी ताकतवर होकर उभरे। लेकिन उनके असामयिक निधन से एनसीपी के एकजुट होने की अटकलें तेज हो गईं। एक बार फिर पूरा पवार कुनबा एक साथ नजर आया। महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र बारामती से यह तस्वीर सामने आई है जिसमें पार्थ पवार और शरद पवार एक साथ बैठकर गुफ्तगू करते नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर से एक बार फिर सियासी गलियारों ने अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
दशक्रिया विधि के दौरान पूरा परिवार एकजुट
दरअसल, शुक्रवार को बारामती में पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर आयोजित दशक्रिया विधि के दौरान पूरा परिवार एकजुट नजर आया। दुख की घड़ी में परिवार की इस एकजुटता पर फिर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं। इस तस्वीर में शरद पवार और उनकी पत्नी प्रतिभा पवार परिवार के साथ नई पीढ़ी , पार्थ पवार, रोहित पवार ,युगेन्द्र पवार नजर आ रहे हैं। सबसे अधिक ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि पार्थ पवार (अजित पवार के पुत्र) और रोहित पवार को शरद पवार के साथ गहन मंत्रणा और सलाह-मशविरा करते देखा गया।
पार्थ, रोहित और शरद एक कतार में, अटकलें तेज
उल्लेखनीय हैं कि हाल के कुछ महीनों में शरद पवार ने हमेशा से ही नई पीढ़ी को राजनीति में आगे बढाने और पार्टी में नेतृत्व की जिम्मेदारी देने पर जोर दिया है। पार्थ, रोहित और शरद पवार का इस तरह से नजदीक आना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस तस्वीर से यह अटकलें लगाई जाने लगी हैं कि शरद पवार भविष्य की किसी बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
क्या दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों का विलय होगा?
अजित पवार के निधन के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों (NCP) का विलय होगा? बारामती की इन तस्वीरों को देखकर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र की सियासत के दिग्गज शरद पवार अब परिवार को फिर से जोड़ने और बिखरी हुई पार्टी को एक छत के नीचे लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
कहीं ये मतभेदों को भुलाकर एक नई शुरुआत तो नहीं?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अजित पवार के निधन के बाद बारामती और पार्टी के सामने जो नेतृत्व का शून्य पैदा हुआ है, उसे भरने के लिए शरद पवार 'नई पीढ़ी' को ढाल बना सकते हैं। पार्थ और रोहित का एक साथ आना इस बात का संकेत हो सकता है कि पवार परिवार राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एक नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ा सकता है।