अमरावती/कुरनूल: आंध्र प्रदेश में तिरुपति लड्डू की मिलावट का मामला अब और गरमा गया है। सूबे के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने आरोप लगाया है कि पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के शासनकाल में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) से करीब 1 लाख मिलावटी लड्डू अयोध्या भेजे गए। वहीं, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि जगन सरकार ने शुद्ध घी की जगह बाथरूम साफ करने वाले केमिकल मिलाकर लड्डू बनवाए थे। दोनों नेताओं ने इसे भगवान वेंकटेश्वर की आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।
'राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में भेजे गए मिलावटी लड्डू'
पवन कल्याण ने कहा कि जब पूरा देश राम मंदिर के उद्घाटन की खुशी मना रहा था, तब जगन मोहन रेड्डी सरकार ने करीब एक लाख मिलावटी TTD लड्डू अयोध्या भेजे। उन्होंने इसे पवित्र मौके पर किया गया कलुषित काम बताया और पूछा, 'क्या ये वही मिलावटी लड्डू थे जो बाद में जांच में पकड़े गए?' पवन कल्याण ने जांच के हवाले से बताया कि लड्डू में शुद्ध घी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हुआ। इसके बजाय वनस्पति घी या पाम ऑयल जैसे सस्ते तेलों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि लड्डुओं के निर्माण में कुल 59.70 से 60 लाख किलोग्राम ऐसी घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ।
'ऐसे धार्मिक अवसर पर मिलावटी प्रसाद भेजना गलत'
पवन कल्याण ने कहा कि यह सिर्फ मिलावट नहीं, बल्कि पूरी तरह से शुद्ध घी को सस्ती चीजों से बदलने का काम है। उन्होंने कहा कि लाखों ऐसे मिलावटी लड्डू बनाए और बांटे गए, जिनमें से एक लाख राम मंदिर को भेजे गए। पवन कल्याण ने कहा, 'ऐसे बड़े धार्मिक अवसर पर भी मिलावटी प्रसाद भेजना गलत है।' उन्होंने TTD में सामग्री खरीद, गुणवत्ता जांच और राजनीतिक दखलंदाजी पर पूरी पारदर्शिता की मांग की। बता दें कि मिलावटी लड्डू की खबरें सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने सोशल मीडिया पर कहा था कि इससे उनकी आस्था को ठेस पहुंची है।
'श्रीशैलम मंदिर में भी 5 साल तक चली मिलावट'
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले में एक सभा में कहा कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी इस्तेमाल किया, जिसमें 'बाथरूम साफ करने वाले केमिकल' मिले थे। उन्होंने कहा कि इससे भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। नायडू ने कहा कि यह मिलावट सिर्फ तिरुपति तक नहीं, बल्कि श्रीशैलम मंदिर में भी 5 साल तक चली। उन्होंने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला दिया कि जांच में 2 तरह के केमिकल पाए गए, एक वनस्पति आधारित और महंगा, दूसरा जानवरों की चर्बी से बना और सस्ता। उन्होंने कहा कि सस्ती चर्बी का इस्तेमाल इसलिए हुआ क्योंकि यह शुद्ध घी से कम कीमत वाला था।


