महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद के बीच राज्य के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन का एक बयान आया, जिस पर अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता संदीप देशपांडे ने प्रतिक्रिया दी है। देशपांडे ने राज्यपाल के वक्तव्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में होने वाले निवेश का फायदा सबसे पहले भूमिपुत्रों यानी मराठी लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल को मराठी स्वाभिमान और भाषा के अपमान में अंतर समझने की भी बात कही।
मनसे नेता ने राज्यपाल के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगर कोई मराठी नहीं बोलेगा और उसे मारा जाएगा। देशपांडे ने कहा कि मैं उन्हें बता दूं कि किसी ने मराठी नहीं बोला तब उन्हें नहीं मारा गया। किसी ने मराठी भाषा का अपमान किया तब उन्हें मारा है। देशपांडे ने कहा कि स्वाभिमान और इस तरह की बातों में अंतर राज्यपाल को समझना चाहिए, यह मेरी उनसे विनम्रतापूर्वक विनती है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने अपने एक बयान में कहा, "हमें अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिए और हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए।" राज्यपाल ने एक वाकया सुनाते हुए कहा, ''जब मैं तमिलनाडु में सांसद था, तो एक दिन मैंने कुछ लोगों को किसी को पीटते हुए देखा। जब मैंने उनसे समस्या पूछी, तो वे हिंदी में बात कर रहे थे। फिर होटल मालिक ने मुझे बताया कि वे तमिल नहीं बोलते हैं और लोग उन्हें तमिल बोलने के लिए पीट रहे थे।"
राज्यपाल ने आगे कहा, ''अगर हम इस तरह की नफरत फैलाएंगे, तो कौन आएगा और निवेश करेगा। लंबे समय में, हम महाराष्ट्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। मैं हिंदी समझने में असमर्थ हूं और यह मेरे लिए एक बाधा है। हमें अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिए और हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए।"
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