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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हार्ट अटैक से एसएजी में तैनात पुलिसकर्मी की मौत

 Published : Feb 13, 2025 10:55 am IST,  Updated : Feb 13, 2025 03:41 pm IST

गढ़चिरौली में हार्ट अटैक से एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। रविश मधुमटके एसएजी गढ़चिरौली में तैनात थे। वह अपने साथियों के साथ रोड ओपनिंग के लिए गए थे।

पुलिसकर्मी रविश मधुमटके- India TV Hindi
पुलिसकर्मी रविश मधुमटके Image Source : INDIA TV

गढ़चिरौलीः महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक पुलिस जवान की रोड ओपनिंग के दौरान मौत हो गई। यह घटना बुधवार शाम करीब 7 बजे की है। जानकारी के अनुसार, रविश मधुमटके (34 वर्ष) विशेष कार्रवाई बल एसएजी गढ़चिरौली में तैनात थे। वह अपनी टीम के साथ कियार से अलापल्ली मार्ग पर सड़क ओपनिंग के अभियान में पुलिस जवान मधुमटके निकले थे। 

हार्ट अटैक से हुई पुलिसकर्मी की मौत

इस बीच पुलिस स्टेशन से पांच किमी चलने के बाद उन्होंने अस्वस्थ महसूस करने की शिकायत की और उन्हें तुरंत भामरागढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र आरएचसी में स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि रविश मधुमटके की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने के कारण हुई। उनका अंतिम संस्कार आज गढ़चिरौली में होगा।

नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में जवान शहीद

इससे पहले गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में घायल हुआ सी-60 का एक जवान मंगलवार को शहीद हो गया। पुलिस ने बताया कि शहीद जवान की पहचान 39 वर्षीय महेश नागुलवार के रूप में हुई है, जो गढ़चिरौली का रहने वाला था और स्पेशल ऑपरेशन स्क्वॉड से जुड़ा हुआ था।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिरांगी और फुलनार गांव के बीच नक्सली शिविर स्थापित किए जाने की खुफिया सूचना के आधार पर सोमवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 18 सी-60 इकाइयों और 2 क्यूएटी इकाइयों ने अभियान शुरू किया था। अधिकारी के मुताबिक, अभियान में नागुलवार को गोली लगी और उसे हेलीकॉप्टर से इलाज के लिए गढ़चिरौली ले जाया गया, जहां वह शहीद हो गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि राज्य सरकार मुठभेड़ में शहीद हुए जवान के परिवार को दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगी।  

क्या बोले गढ़चिरौली के सहपालक मंत्री

गढ़चिरौली के सहपालक मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा, कल शहीद हुए एक जवान की पत्नी ने आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया कराई होती तो उनके पति की जान नहीं जाती। इसी तरह भामरागढ़ के एक पुलिसकर्मी की हार्ट अटैक से मौत के बाद उसकी पत्नी ने पुलिस पर हमला करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन ने उसके पति के स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखा। मैं कल उनके गांव में गया था प्रत्यक्ष रूप से उनसे मुलाकात की मुझे इस तरह की कोई बात उन्होंने नहीं कही। अगर इस तरह की कोई शिकायत होती तो जरूर लिख के देना चाहिए। इस चीज का मैने खुद रिव्यू किया कि क्या बुलेट प्रूफ जैकेट दी जा सकती थी, क्योंकि नक्सल का जो भाग था, जहां पर हमला हुआ वो एरिया उच्ची पहाड़ी पर था। एसपी ने मुझे ऐसा बताया कि ऊंची एरिया पर बुलेट प्रूफ जैकेट पहन के प्रवास करना पॉसिबल नहीं था। अगर उनकी फैमिली के कुछ आरोप होंगे तो जरूर इसकी जांच होंगी। लेकिन मैं मानता हूं कि घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। साढ़े चार साल बाद इस तरह से मृत्यु होना, ये प्रशासन के लिए चुनौति है। पूरी तरह से नक्सलवाद कैसे खत्म हो सकता है हम प्रयास करेंगे और जवानों के सुरक्षा के लिए क्या किया जा सकता है, इस विषय में मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे।

रिपोर्ट- नरेश सहारे, गढ़चिरौली

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