NHAI के एक अधिकारी ने बताया कि 464 किलोमीटर लंबा 6 लेन का नेशनल हाईवे-130CD रायपुर और विशाखापत्तनम के बीच यात्रा समय को काफी हद तक कम करेगा और छत्तीसगढ़, ओडिशा तथा आंध
क्यूआर कोड वाले साइनबोर्ड न सिर्फ इमरजेंसी और स्थानीय जानकारी तक बेहतर पहुंच के जरिए सड़क सुरक्षा को बढ़ाएंगे बल्कि यूजर एक्सपीरियंस और नेशनल हाईवे के प्रति जागरूकता में भी इजाफा करेंगे।
सरकार का ये नया नियम उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद होगा, जिन लोगों की गाड़ियों पर फास्टैग नहीं है या बंद पड़ा है।
अक्सर हाईवे पर यात्रियों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, जहां सही जगह या मदद तक पहुंचने में समय बर्बाद हो जाता है। लेकिन अब यह मुश्किल जल्द ही खत्म होने वाली है। NHAI ने एक बड़ा कदम उठाते हुए यह घोषणा की है कि वह देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर क्यूआर कोड साइन बोर्ड लगाने जा रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के निवासी और यात्री इस खास फ्लाईओवर के बनने से यातायात समस्या के स्थायी समाधान पा सकेंगे। इससे उनके लिए आना-जाना आसान हो जाएगा।
एनएचएआई ने कहा कि ऐसे उदाहरण देखे गए हैं जहां चयनित बोलीदाताओं ने प्राधिकरण की आवश्यक पूर्व स्वीकृति के बिना ठेकेदारों को नियुक्त किया है या स्वीकृत उप-ठेका सीमा को पार कर लिया है।
4-लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर, जिसमें टोल टैक्स की सुविधा है और 100 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड के साथ 80 किमी/घंटा की औसत वाहन गति को सपोर्ट करता है, जो कुल यात्रा समय को लगभग 1.5 घंटे तक कम कर देगा।
बैरियर-फ्री टोलिंग की दिशा में ये एक बड़ा कदम है जिससे फास्टैग के जरिए रुके बिना इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन संभव होगा।
15 अगस्त, 2025 से देशभर में शुरू हुआ फास्टैग एनुअल पास तेजी से खरीदा जा रहा है और इसका इस्तेमाल भी लगातार तेजी से बढ़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के 4 प्रमुख एक्सप्रेसवे- यमुना एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर ये फास्टैग एनुअल पास नहीं चलेगा।
द्वारका एक्सप्रेसवे के 10.1 किलोमीटर लंबे दिल्ली सेक्शन का डेवलपमेंट लगभग 5360 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।
सरकारी बयान में कहा गया है कि नेशनल हाईवे यूजर्स को एक सहज और किफायती यात्रा विकल्प प्रदान करते हुए, फास्टैग एनुअल पास 3000 रुपये की एकमुश्त राशि में एक साल की वैलिडिटी या अधिकतम 200 टोल प्लाजा क्रॉस करने तक वैलिड रहेगा।
फास्टैग एनुअल पास के जरिए न्यूनतम 7000 रुपये और अधिकतम 17,000 रुपये तक की बचत की जा सकती है।
जिन गाड़ियों पर पहले से फास्टैग लगा हुआ है, उन्हें अलग से फास्टैग एनुअल पास खरीदने की जरूरत नहीं है। फास्टैग एनुअल पास, आपके मौजूदा साधारण फास्टैग में ही एक्टिवेट हो जाएगा।
इस प्रोजेक्ट के तहत आगरा से बरेली तक 228 किमी लंबा 4 लेन का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिसकी लागत 7700 करोड़ रुपये है।
सड़क परिवहन मंत्रालय की इस पहल का मकसद डिजिटल माध्यम से टोल शुल्क की वसूली को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि टोल वाले हाइवे पर कोई भी बिना टोल भुगतान किए यात्रा न कर सके।
गोरखपुर–किशनगंज–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार और उत्तर-पूर्व भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट होगा। इससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
एनएचएआई ने एक बयान में कहा कि एनुअल पास सिस्टम और मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग जैसी आगामी पहलों को देखते हुए, फास्टैग की प्रामाणिकता और प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए 'लूज फास्टैग' मुद्दे को हल करना अहम है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है। इस सड़क के बनने से लोगों को आने-जाने में बड़ी राहत और सुविधा हो जाएगी।
मौजूदा नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रत्येक किलोमीटर स्ट्रक्चर के लिए यात्रियों को नियमित टोल का दस गुना भुगतान करते हैं।
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