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बुजुर्गों के शवों की हुई अदला-बदली, अंतिम संस्कार के बाद पता चला तो मच गया बवाल

अलवर जिला अस्पताल से गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लाए गए बुजुर्गों के शवों की अदला-बदली हो गई।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Dec 09, 2025 09:34 pm IST, Updated : Dec 09, 2025 09:55 pm IST
गलत शव सौंपे जाने पर मचा बवाल- India TV Hindi
Image Source : REPORTER गलत शव सौंपे जाने पर मचा बवाल

राजस्थान के अलवर जिला अस्पताल में मंगलवार को एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवालों के बड़े पहाड़ खड़े कर दिए हैं। यहां लापरवाही का ऐसा मामला उजागर हुआ है, जहां दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों से लाए गए बुजुर्गों के शवों की अदला-बदली हो गई। परिजन अपने असली मृतक को लेने पहुंचे, लेकिन उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति का शव थमा दिया गया। उस शव का न केवल पोस्टमार्टम हुआ, बल्कि परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार भी पूरा कर दिया। 

पूरा घटनाक्रम उद्योग नगर थाना क्षेत्र से शुरू हुआ, जहां एक झोपड़ी से एक बुजुर्ग का शव मिला था और उसे जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। इसी दौरान जीआरपी थाना क्षेत्र से एक ट्रेन के अंदर एक अन्य बुजुर्ग का शव मिला, जिसे भी मोर्चरी में लाकर रखा गया। पहचान के दौरान राजगढ़ थाना क्षेत्र के परिजन जिला अस्पताल पहुंचे और उन्होंने समझ लिया कि मिला हुआ शव उनका ही है।

पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद मृतक का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। लेकिन हैरानी तब हुई जब दो दिन बाद जीआरपी थाना पुलिस द्वारा परिजनों को सूचना दी गई कि उनके परिजन का पोस्टमार्टम करवाना है और वे अस्पताल पहुंचें। यह सुनते ही परिजन स्तब्ध रह गए। उन्हें समझ आ गया कि जिला अस्पताल ने उन्हें गलत शव थमा दिया था। 

अस्पताल प्रशासन की लापरवाही

सूचना मिलते ही परिजन हरिद्वार में चल रही अंतिम यात्रा को छोड़कर तुरंत अलवर जिला अस्पताल पहुंचे। उद्योग नगर थाना प्रभारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि मृतक करीब 50–52 साल से अपने घर से बाहर रहकर काम करता था, इसलिए परिजन उसे स्पष्ट रूप से पहचान नहीं पाए। वहीं, जीआरपी थाना प्रभारी अंजू महिंद्रा ने कहा कि हम नियमित प्रक्रिया के तहत 72 घंटे बाद पोस्टमार्टम करवाते हैं और परिजनों को सूचना भी दे दी गई थी।

परिजनों का आरोप है कि यह सीधी-सीधी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल को शव की उचित पहचान के बाद ही सौंपना चाहिए था, लेकिन जल्दबाजी और अनदेखी के कारण उन्हें गलत शव दे दिया गया। उनकी पीड़ा इस बात से और बढ़ गई कि उन्होंने जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया, उसमें गरीब परिवार का पैसा भी खर्च हो गया, अब वह नुकसान कौन भरेगा? 

फिलहाल, परिजन जिला अस्पताल पहुंचकर अपने असली परिजन का शव लेने की प्रक्रिया में लगे हैं, जबकि पुलिस नए सिरे से पोस्टमार्टम करवाने में जुटी है। अस्पताल प्रशासन के लिए यह मामला गंभीर लापरवाही का द्योतक है, जिसका उत्तर पूरे जिले की जनता मांग रही है। प्रशासन अब क्या कदम उठाता है, यह आने वाला समय ही बताएगा।

(रिपोर्ट- मुदित गौड़)

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