राजस्थान के अलवर में धर्मांतरण गैंग पर बड़ा एक्शन लिया गया है। मिशनरी हॉस्टल में रेड डालकर 52 बच्चों को छुड़ाया गया है। आरोप है कि गरीब बच्चों को शिक्षा के नाम पर यहां धर्मांतरण का खेल खेला जा रहा था। बच्चों को दूसरे धर्म के प्रति नफरत सिखाया जा रहा है। पुलिस की टीम जैसे ही हॉस्टल के अंदर पहुंची भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। डरे सहमे बच्चे स्कूल की दीवार से कूद कर भागने की कोशिश करने लगे। 6 से 17 साल के बच्चे यहां रखे गए थे।
हॉस्टल में क्या सिखा रहे थे?
हॉस्टल से छुड़ाए गए ज्यादातर बच्चे गरीब फैमिली के बताए जा रहे हैं जिनको शिक्षा के नाम पर यहां लाया गया था लेकिन ब्रेनवॉश किया जा रहा था। हॉस्टल में सिखा रहे थे-भगवान को मानोगे तो नर्क जाओगे। मूर्ति को पानी में डालकर कहते ये डूबती है, क्रॉस नहीं डूबती है.. ईसाई धर्म को मानने के लिए देवी-देवताओं के प्रति घृणा द्वेष भरी जा रही थी।
किस समुदाय के बच्चे थे?
पुलिस ने जैसे ही हॉस्टल में रेड मारी बच्चों में दहशत फैल गयी। डरे सहमे बच्चे दीवार से कूदकर भागने की कोशिश करने लगे जिन्हें समझाकर रोका गया। हॉस्टल के अंदर मौजूद 52 बच्चों को पुलिस ने छुड़ाया है। जिनकी उम्र 6 से 17 साल के बीच है। 8 से 9 बच्चे दिल्ली के रहने वाले हैं। हिंदू, मुस्लिम, सिख समाज के बच्चे हॉस्टल के अंदर थे।
- हॉस्टल से 52 बच्चों को छुड़ाया गया।
- 6-17 साल के बच्चों को रखा गया था।
- 8 से 9 बच्चे दिल्ली के रहने वाले हैं।
- मूर्ति-क्रॉस को पानी में डूबोकर अंतर बताते थे।
- हिंदू, सिख, मुस्लिम समाज के बच्चे लाए गए थे।
दो आरोपी गिरफ्तार
हिंदू संगठन के लोगों का आरोप है बच्चों को हॉस्टल के अंदर मारा पीटा जा रहा था, जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में अहमदाबाद के रहने वाले अमृत सिंह और अलवर के रहने वाले सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया गया है। हॉस्टल में सिखाया जा रहा था कि भगवान को मानोगे तो नर्क में जाओगे। मास्टर माइंड समेत 2 को अरेस्ट कर पुलिस छानबीन में जुटी है। मुख्य आरोपी धर्म परिवर्तन के मामले में सीकर में भी पकड़ा गया था। वहां से जमानत पर छूटकर अलवर आया था।
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