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बेचे गोलगप्पे, टेंट में गुजारी रात, कुछ ऐसी है दोहरा शतक जड़ इतिहास रचने वाले यशस्वी की कहानी

भारतीय घरेलू क्रिकेट में मुम्बई के लिए पहली बार लिस्ट ए टूर्नामेंट खेलने वाले यशस्वी ने अपनी 203 रनों की पारी के दौरान 154 गेंदों का सामना किया।

Written by: India TV Sports Desk
Published : Oct 17, 2019 01:46 pm IST, Updated : Oct 17, 2019 02:41 pm IST
Yashasvi Jaiswal- India TV Hindi
Image Source : TWITTER Yashasvi Jaiswal

अगर मजबूत हो इरादें तो मंजिल तक जाने वाल रास्ता कितना भी कठिन क्यों ना हो आप पहुँच ही जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मुंबई की गलियों में गोल गप्पे और मैदान के टेंट में सोने वाले महज 17 साल के युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल ने, जिन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी मैच में दोहरा शतक जड़कर भारत के हर कोने में अपने नाम का डंका बजवा दिया है। इतना ही नहीं अपने दोहरे शतक के साथ यशस्वी ऐसा कारनामा करने वाले भारत के सबसे (17 साल) युवा बल्लेबाज बन गए हैं। 

भारतीय घरेलू क्रिकेट में मुम्बई के लिए पहली बार लिस्ट ए टूर्नामेंट खेलने वाले यशस्वी ने अपनी 203 रनों की पारी के दौरान 154 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उन्होंने 17 चौके और 12 छक्के मारे। जिसके चलते मुम्बई को मैच में जीत हासिल हुई। ऐसे में यशस्वी कोई एक दिन में मुम्बई या भारतीय घरेलू क्रिकेट के स्टार नहीं बन गए हैं। इसके पीछे हैं उनके सालों की मेहनत और कठिन तपस्या। जिसमें पक कर यशस्वी अब अपने बल्ले की चमक को बिखेर रहे हैं।  

दरअसल, यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। जहां उनके पिता एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। क्रिकेटर बनने की चाहत लिए वो 10 साल की उम्र में मुंबई आ गए। उनके रिश्तेदार संतोष का घर मुंबई के वर्ली में है, लेकिन वहां रहना भी मुश्किल था। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका घर बहुत छोटा था। इसलिए मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के मैनेजर संतोष ने वहां के मालिक से गुजारिश करके यशस्वी के रूकने की व्यवस्था करा दी। जिसके चलते यशस्वी को ग्राउंड्समैन के साथ मैदान के टेंट में रहना पड़ता था।

ऐसे में पेट पालने और पॉकेट मनी के लिए यशस्वी ने गोलगप्पे भी बेचे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यशस्वी को पेट पालने के लिए गोपगप्पे भी बेचना पड़ा है। दरअसल यशस्वी खाने का जुगाड़ करने के लिए आजाद मैदान में राम लीला के दौरान गोपगप्पे और फल बेचने में मदद करते थे। मगर इस दौरान उनकी बल्लेबाजी में भी जबरदस्त निखार आ रहा था और इतना ही नहीं यशस्वी सचिन के बेटे अर्जुन के अच्छे दोस्त भी है। दोनों की मुलाकर राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी बेंगलुरु में हुयी थी। जिसके चलते उनकी मुलाकात क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से हुई। 

बात 2018 की है जब अर्जुन यशस्वी को अपने घर ले गए। पहली मुलाकात में ही सचिन ने यशस्वी से प्रभावित होकर उन्हें अपना बल्ला गिफ्ट में दे दिया। इस प्रेरणा दायक पल के बाद यशस्वी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार रन बनाते चले गए। जिसके चलते उन्होंने टीम इंडिया की अंडर 19 टीम में बतौर सलामी बल्लेबाज जगह बनाई। उसके बाद अब मुंबई के लिए विजय हजारे ट्रॉफी में खेले गए अभी तक 5 मैचों में वो 2 शतक और एक दोहरा शतक जड़ चुके हैं। ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब हम इस बल्लेबाज को टीम इंडिया की जर्सी में खेलते देखेंगे। क्योंकि अगर इसी रफ़्तार से यशस्वी रन मारते गये तो उनका टीम में जल्द आना संभव है। 

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