विदर्भ क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 का खिताब अपने नाम कर लिया है। हाई-स्कोरिंग फाइनल मुकाबले में विदर्भ ने सौराष्ट्र को 38 रन से मात देकर 2024-25 सीजन में मिली निराशा का करारा बदला चुकता किया। फाइनल मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए विदर्भ ने 50 ओवर में 8 विकेट पर 317 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में सौराष्ट्र की टीम 279 रन पर सिमट गई। अथर्व तायडे को प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड से नवाजा गया जबकि अमन मोखाड़े को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया।
अथर्व तायडे का शानदार शतक
विदर्भ की जीत की नींव युवा बल्लेबाज अथर्व तायडे ने रखी, जिन्होंने शानदार 128 रनों की पारी खेली। यह उनके लिस्ट-ए करियर का तीसरा शतक रहा। तायडे को यश राठौड़ (54 रन) का बेहतरीन साथ मिला, जिन्होंने पारी को संभाले रखा। मैच से ठीक पहले ध्रुव शौरी के पीठ दर्द के कारण बाहर होने के बावजूद विदर्भ की बल्लेबाजी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। अथर्व तायडे और अमन मोखाडे ने पहले विकेट के लिए सधी हुई शुरुआत की और 80 रन की साझेदारी निभाई। मोखाडे 33 रन बनाकर आउट हुए।
नंबर तीन पर उतरे यश राठौड़ ने एंकर की भूमिका निभाई, जिससे तायडे खुलकर खेल सके। तायडे को पारी की शुरुआत में दो जीवनदान भी मिले, जिनका उन्होंने पूरा फायदा उठाया। अर्धशतक के बाद उन्होंने गियर बदला और बड़े शॉट खेलते हुए शतक पूरा किया। हालांकि, अंतिम ओवरों में अंकुर पंवार (4 विकेट) और चेतन सकारिया की कसी हुई गेंदबाजी के कारण विदर्भ आखिरी पांच ओवरों में सिर्फ 36 रन ही जोड़ सका।
पीछा करते हुए लड़खड़ाया सौराष्ट्र
317 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सौराष्ट्र को शुरुआत में ही झटके लगे। हालांकि, प्रेरक मांकड़ ने शानदार संघर्ष करते हुए 88 रन बनाए और टीम को मुकाबले में बनाए रखा। 38वें ओवर में कप्तान हर्ष दुबे ने मांकड़ को LBW आउट कर मैच का रुख पलट दिया। यह विकेट 93 रन की अहम साझेदारी का अंत साबित हुआ। इसके बाद चिराग जानी (64 रन) पर सौराष्ट्र की उम्मीदें टिकी रहीं, लेकिन अंतिम ओवरों में विदर्भ के तेज गेंदबाजों ने कमाल कर दिया। दर्शन नालकांडे की शानदार स्लोअर गेंद पर जानी का विकेट गिरते ही सौराष्ट्र की पारी बिखर गई। इसके बाद यश ठाकुर (4 विकेट) और नचिकेत भूटे (3 विकेट) ने तेजी से विकेट चटकाते हुए विदर्भ की ऐतिहासिक जीत पर मुहर लगा दी।
तेज गेंदबाजों ने दिलाया खिताब
खिताबी मुकाबले में ओस के बावजूद विदर्भ के तेज गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी की। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली विदर्भ की टीम को इस बार खिताब जीतने से कोई नहीं रोक सका। लगातार दूसरी बार फाइनल खेलने के बाद इस बार विदर्भ ने मौका नहीं गंवाया और विजय हजारे ट्रॉफी अपने नाम करते हुए नया इतिहास रच दिया।
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