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Starlink का इंतजार खत्म! भारत में सर्विस शुरू करने के लिए जल्द मिलेगा फाइनल अप्रूवल

Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh Published : Jun 28, 2025 04:42 pm IST, Updated : Jun 28, 2025 04:42 pm IST

Starlink अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस को भारत में जल्द शुरू कर सकता है। एलन मस्क की कंपनी को जल्द ही रेगुलेटर की तरफ से फाइनल अप्रूवल लेटर मिल सकता है। लेटर मिलने के बाद स्टारलिंक को स्पेक्ट्रम अलोकेशन का इंतजार रहेगा।

Starlink- India TV Hindi
Image Source : FILE स्टारलिंक (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Starlink को भारत में अपनी सैटेलाइट सर्विस शुरू करने का फाइनल लेटर जल्द मिलने वाला है। लेटर मिलने के बाद कंपनी भारत में सर्विस शुरू करने के लिए एलीजिबल हो जाएगी। फिलहाल सरकार ने एलन मस्क की कंपनी को भारत में अपनी सैटेलाइट सर्विस को टेस्ट करने का लेटर दिया है। फाइनल लेटर मिलने से पहले कंपनी को अपनी सर्विस को यहां के रेगुलेटर को डेमोन्स्ट्रेट करना होगा। सिक्योरिटी एजेंसियों से हरी झंडी मिलने के बाद ही कंपनी को फाइनल लेटर दिया जाएगा।

ET टेलीकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe ने एलन मस्क की सैटेलाइट सर्विस देने वाली कंपनी को फाइनल अप्रूवल देने वाला डॉक्यूमेंट ड्राफ्ट कर लिया है। IN-SPACe (इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथोराइजेशन सेंटर) ने स्टारलिंक को पिछले दिनों लेटर ऑफ इंटेंट दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जल्द ही स्टारलिंक को सर्विस शुरू करने के लिए ऑथोराइज्ड कर दिया जाएगा।

भारत में स्टारलिंक से पहले Eutelsat OneWeb (Bharti Airtel) और Jio Satellite को सर्विस शुरू करने का अप्रूवल मिल चुका है। स्पेक्ट्रम अलोकेशन होने के बाद ये कंपनियां भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च कर सकती हैं। स्टारलिंक को हाल ही में ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाई सैटेलाइट (GMPCS) का अप्रूवल मिला था। इस तरह से स्टारलिंक तीसरी ऐसी कंपनी बन गई है, जिसे भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च करने का अप्रूवल दिया गया है।

क्या फाइनल लेटर मिलते ही शुरू होगी सर्विस?

स्टारलिंक को फाइनल लेटर मिलने के बाद भी सर्विस शुरू करने में समय लग सकता है। कंपनी को कमर्शियल सर्विस ऑफर करने में और लंबा समय लग सकता है। सबसे पहले स्टारलिंक को भारत में अर्थ स्टेशन जिसे बेस स्टेशन भी कहा जाता है, सेटअप करने की जरूरत है। इस बेस स्टेशन के जरिए ही भारत में सैटेलाइट सर्विस को कंट्रोल किया जा सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेटअप करने के बाद स्टारलिंक को अपनी सर्विस को यहां के सिक्योरिटी कंप्लायेंस का नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा। सर्टिफिकेट मिलने के बाद स्टारलिंक को रेगुलेटर से स्पेक्ट्रम अलोकेट करने का इंतजार रहेगा। दूरसंचार विभाग और नियामक सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स को एडमिनिस्ट्रेशन लेवल पर स्पेक्ट्रम अलोकेट करेगी। OneWeb और Jio को साल 2022 में भी फाइनल अप्रूवल दिया जा चुका है। स्टारलिंक को भी अगर फाइनल अप्रूवल मिल जाएगा, तो भारत में सैटेलाइट सर्विस शुरू करने वाली तीन कंपनियां रेस में होंगी।

कितनी होगी कीमत?

स्टारलिंक ने भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश और भूटान में अपनी सैटेलाइट सर्विस हाल ही में लॉन्च की है। भारत में भी स्टारलिंक की सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस की प्राइसिंग भी बांग्लादेश और भूटान की तरह ही होगी। भारत में इसके लिए यूजर्स को हर महीने 3,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है। इसके अलावा यूजर्स को डिवाइस के लिए वन-टाइम पेमेंट भी करना पड़ेगा। स्टारिलंक ने भारत में अपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस के इक्वीपमेंट्स के लिए एयरटेल और जियो के साथ साझेदारी की है। एयरटेल और जियो के स्टोर पर यूजर्स को स्टारलिंक के इक्विपमेंट्स भी मिल सकेंगे।

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