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BRS के पूर्व विधायक के पास जर्मन नागरिकता! तेलंगाना हाई कोर्ट ने लगाया 30 लाख का जुर्माना; जानें क्या है मामला

 Edited By: Amar Deep
 Published : Dec 09, 2024 11:18 pm IST,  Updated : Dec 09, 2024 11:18 pm IST

तेलंगाना में बीआरएस के पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश पर तेलंगाना हाई कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने ये जुर्माना उनपर अपनी जर्मन नागरिकता के बारे में जानकारी छिपाने को लेकर लगाई है।

पूर्व विधायक पर हाई कोर्ट ने लगाया जुर्माना।- India TV Hindi
पूर्व विधायक पर हाई कोर्ट ने लगाया जुर्माना। Image Source : FILE PHOTO

हैदराबाद: जर्मन नागरिकता मामले में बीआरएस के पूर्व विधायक को बड़ा झटका लगा है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस मामले में पूर्व विधायक पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। दरअसल, तेलंगाना होई कोर्ट ने सोमवार को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश पर ये जुर्माना लगाया है। चेन्नामनेनी रमेश पर अपनी जर्मन नागरिकता से संबंधित तथ्यों को छिपाने और गलत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। 

कोर्ट ने बरकरार रखा 2019 का फैसला

पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश की याचिका को हाई कोर्ट खारिज कर दिया। इसके अलावा हाई कोर्ट ने उनकी भारतीय नागरिकता रद्द करने के केंद्रीय गृह मंत्रालय के 2019 के आदेश को बरकरार रखा। तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस मामले को लेकर कहा कि वेमुलावाड़ा सीट से पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश ‘नागरिकताविहीन’ नहीं हैं, क्योंकि उनके पास जर्मन पासपोर्ट है। हाई कोर्ट ने पाया कि उसके निर्देशों के बावजूद पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश यह साबित करने वाले दस्तावेज पेश करने में असफल रहे कि उन्होंने अपनी जर्मन नागरिकता त्याग दी है। इसके साथ ही तेलंगाना हाई कोर्ट ने बीआरएस के पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। 

कांग्रेस विधायक को देना होगा 25 लाख रुपया

तेलंगाना हाईकोर्ट ने जुर्माने के 30 लाख रुपये में से 25 लाख रुपये एक महीने में वेमुलावाड़ा से कांग्रेस विधायक आदि श्रीनिवास को देने का निर्देश दिया है। दरअसल, कांग्रेस विधायक आदि श्रीनिवास ने पहले पूर्व विधायक चेन्नामनेनी रमेश की भारतीय नागरिकता को चुनौती दी थी। इस दौरान उन्हें मुकदमे पर खर्च करना पड़ा। इसके अलावा हाई कोर्ट ने बाकी 5 लाख रुपये की राशि विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने को कहा है। बता दे कि भारत में दोहरी नागरिकता का कोई प्रावधान नहीं है। जन प्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो भारतीय नागरिक नहीं है, वह किसी भी चुनाव में प्रत्याशी बनने या मत देने का अधिकारी नहीं है। (इनपुट- एजेंसी)

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