IFSC और MICR दोनों ही बैंकिंग व्यवस्था की मजबूत कड़ी हैं। ये न केवल लेनदेन को तेज और सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि ग्राहकों को भरोसेमंद बैंकिंग अनुभव भी प्रदान करते हैं।
लॉकर के मामले में जब बैंक की कमियों, किसी गलती या लापरवाही की वजह से नुकसान होता है, तो बैंक जिम्मेदार होता है। साथ ही, बैंक अपने किसी भी कर्मचारी की धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं।
सरकारी बैंकों में आज नकद लेन-देन, चेक क्लीयरेंस और प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे यूपीआई और इंटरनेट बैंकिंग सुचारू रूप से जारी रहेंगी।
आज के समय में क्रेडिट कार्ड सुविधा के साथ-साथ जिम्मेदारी भी मांगता है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह आपकी वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाता है, लेकिन जरा-सी लापरवाही आपके खर्च बढ़ाने के साथ-साथ क्रेडिट स्कोर को भी नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
पंजाब नेशनल बैंक ने बताया कि SEFL से जुड़े मामले में 1,240.94 करोड़ रुपये और SIFL से संबंधित 1,193.06 करोड़ रुपये की राशि को उधार धोखाधड़ी के रूप में RBI को रिपोर्ट किया गया है।
अगर आप किसी बैंक अकाउंट में पैसा जमा कर लंबे समय से भूल गए हैं या आपको लगता है कि आपका कोई अनक्लेम्ड डिपॉजिट तो किसी बैंक में जमा नहीं है तो इसका पता आप आसानी से आरबीआई के UDGAM पोर्टल या वेबसाइट से लगा सकते हैं। इन पैसों के बारे में ऑनलाइन पता करना काफी आसान है।
भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक खाते में लगातार 2 साल तक कोई लेनदेन नहीं होता, तो वह खाता निष्क्रिय (डॉरमेंट अकाउंट) की कैटेगरी में आ जाता है। हालांकि, आप चाहें तो अपना पैसा निकाल सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड एक पेमेंट कार्ड है जो बैंक द्वारा जारी किया जाता है। इससे आप उधार पर सामान और सेवाएं खरीद सकते हैं या नकद निकाल सकते हैं, जिसे आपको बाद में ब्याज सहित चुकाना होता है।
बैंक की तरफ से किए जा रहे इस बदलाव से ऑनलाइन गेमिंग, वॉलेट यूज और हाई-वैल्यू खर्च करने वाले ग्राहकों पर इसकी सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। ऐसे में कार्डधारकों के लिए अपनी स्पेंडिंग हैबिट्स और कार्ड बेनिफिट्स की दोबारा समीक्षा करना जरूरी हो गया है।
बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनके जवाब और अतिरिक्त दस्तावेजों की समीक्षा के बाद RBI ने पाया कि उल्लंघन के आरोप सही हैं और इसके लिए आर्थिक दंड लगाना आवश्यक है।
नए साल की शुरुआत जहां उम्मीदों और नई योजनाओं के साथ होती है, वहीं 2026 आम लोगों के लिए कुछ महंगी सौगातें भी लेकर आ रहा है। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सेवाओं का इस्तेमाल करने वालों को अब अपनी जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी
केंद्रीय बैंक ने प्रभावित बैंक के जमाकर्ताओं को बड़ा आश्वासन दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि योग्य जमाकर्ताओं को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के नियमों के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और इसका बीमा लाभ मिलेगा।
आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत आरबीआई को मिली शक्तियों के अनुसार यह एक्शन लिया गया है। आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना के कारण भी इन पर कार्रवाई हुई है।
केनरा बैंक की इस पहल का मकसद न केवल स्थानीय उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना है। स्थानीय उत्पादों की बिक्री और प्रचार के लिए मंच प्रदान करना है।
ICICI Bank ने इस फैसले में बदलाव, ग्राहकों को अधिक लचीलापन और सुविधा देने के उद्देश्य से किया है, जिससे ज्यादा लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ सकें।
आरबीआई की यह पहल न केवल चेक क्लियरिंग प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि ग्राहकों को भी तेज सेवा का अनुभव होगा। यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और महत्वपूर्ण प्रगति है।
दिल्ली सरकार के विधि विभाग ने उपराज्यपाल को बैंकिंग, एनबीएफसी और गैस सप्लाई को सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के दायरे में लाने का प्रस्ताव दिया था।
आरबीआई ने जारी एक सर्कुलर में कहा कि सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए आसान और किफायती फाइनेंस की उपलब्धता सबसे अहम है।
अगर आपको बैंक से जुड़ा काम-काज है तो उसे पहले ही पूरा करने की कोशिश करें, अन्यथा आपको इंतजार करना पड़ सकता है।
दोनों सेक्टर के बैंकों के बीच उनकी शुद्ध ब्याज आय, अर्जित ब्याज और भुगतान किए गए ब्याज के बीच का अंतर, स्थिर ऋण वृद्धि द्वारा समर्थित, साल-दर-साल 3.6% बढ़कर 2.09 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
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