लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित प्राचीन मजारों पर प्रशासन द्वारा चस्पा किए गए नोटिस को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन यानी कि AIMIM ने तीखा विरोध जताया है। पार्टी के यूपी सेंट्रल अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने एक प्रेस वार्ता में नोटिस को भ्रामक और गैरकानूनी बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि KGMU प्रशासन ने 6-7 मजारों पर नोटिस लगाकर 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। नोटिस में कहा गया है कि मजारें खुद हटा लें, वरना प्रशासन उन्हें तोड़ देगा और खर्च मजार कमेटी से वसूला जाएगा।
सिद्दीकी ने नोटिस को असंवैधानिक करार दिया और कहा कि KGMU जैसी संस्था को अकेले ऐसा नोटिस चस्पा करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई अतिक्रमण लगता है तो शासन-प्रशासन को सूचित करना चाहिए। सिद्दीकी ने जोर देकर कहा, 'ये मजारें और दरगाहें KGMU बनने से बहुत पहले से मौजूद हैं। अंग्रेजी शासनकाल से पहले की ये संरचनाएं हैं। जब KGMU का निर्माण हो रहा था, तब भी प्रशासन ने इन मजारों को छोड़ दिया था और उनके ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया था। आज अचानक इन्हें अवैध बताना साजिश है।'
सिद्दीकी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, जिसका उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने साथ ही पूजा स्थल अधिनियम 1991 का जिक्र किया, जिसमें 15 अगस्त 1947 के बाद किसी भी पूजा स्थल की स्थिति बदलने पर रोक है। इस सवाल पर कि KGMU प्रशासन का कहना है कि अगरबत्ती और धूप से मरीजों को परेशानी होती है, सिद्दीकी ने इसे हवा-हवाई और निराधार बताते हुए कहा कि शहर में सड़कों पर जो प्रदूषण फैला है, उससे कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगरबत्ती के धुएं से समस्या बताना बेतुका है।
शेख ताहिर सिद्दीकी ने मजारों को आपसी सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक बताते हुए चेतावनी दी कि अगर इन मजारों पर बुलडोजर चलाने की कोशिश की गई तो AIMIM खामोश नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में जिले-जिले में आंदोलन करेगी। सिद्दीकी ने कहा, 'हमारे सीनों पर बुलडोजर चलेगा, तभी कोई मजार को छू पाएगा।' उन्होंने कहा कि किसी भी टकराव की जिम्मेदारी प्रशासन और शासन पर होगी। उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार जताते हुए कहा कि AIMIM मजारों और दरगाहों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
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