Sunday, February 08, 2026
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देशभर में साइबर ठगी करने में शामिल गिरोह का भंडाफोड़, 12 गिरफ्तार, व्हाटसऐप ग्रुप से चलता था पूरा खेल

देशभर में ये गिरफ्तारी उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से हुई है। ये सभी आरोपी व्हाटसऐप ग्रुप के माध्यम से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे।

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Feb 08, 2026 06:41 am IST, Updated : Feb 08, 2026 07:19 am IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

अलीगढ़ साइबर पुलिस ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर देश भर में साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों से उसके कथित 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा कि गिरोह के विदेश से भी संबंध होने के संकेत मिले हैं। 

इन राज्यों से किए गए गिरफ्तार

पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमृत जैन ने कहा कि आरोपियों को पिछले 24 घंटों में ओडिशा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। गिरोह देशभर में व्हाटसऐप ग्रुप के जरिए शेयर बाजार में निवेश के नाम पर साइबर ठगी करने में संलिप्त था। 

600 व्हाटसऐप ग्रुप की पहचान

जैन ने कहा कि दूरसंचार मंत्रालय के साथ समन्वय कर अलीगढ़ पुलिस के साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने लगभग 600 व्हाटसऐप ग्रुप की पहचान की, जिनका इस्तेमाल देश भर के निवेशकों को प्रलोभन देने और ठगी करने में होता था। पुलिस ने दावा किया कि समय पर कार्रवाई से लगभग 500 करोड़ रुपये के अनुमानित धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिली, जिससे देश भर में 1.5 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हो सकते थे। 

हर हफ्ते 40% तक मुनाफा दिलाने का प्रलोभन 

एसपी ने कहा कि यह मामला तब सामने आया जब पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंधक दिनेश शर्मा ने 31 जनवरी को साइबर अपराध प्रकोष्ठ से संपर्क किया और व्हाटसऐप ग्रुप-आधारित निवेश योजना के जरिये 11 लाख रुपये की ठगी की शिकायत की। पुलिस के मुताबिक, शर्मा को कथित तौर पर हर हफ्ते 40 प्रतिशत तक मुनाफा दिलाने का प्रलोभन दिया गया था। 

CBI इंटरपोल की मांगी जाएगी मदद

शिकायत पर कार्रवाई करते हुए साइबर अपराध प्रकोष्ठ शर्मा से ठगे गए 5.64 लाख रुपये वापस पाने में सफल रही और जांच के दौरान एक बड़े गिरोह के शामिल होने की जानकारी मिली। साइबर अपराध प्रकोष्ठ विदेश से काम कर रहे सरगना का पता लगाने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और इंटरपोल से मदद मांगेगी। मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।

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