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23 साल जेल काटने के बाद शख्स को हाई कोर्ट ने किया बरी, जानें क्यों छूटा पत्नी और 3 बच्चों की हत्या का आरोपी

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Feb 26, 2026 11:49 pm IST, Updated : Feb 26, 2026 11:49 pm IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 23 साल जेल काट चुके रईस को पत्नी और 3 बच्चों की हत्या मामले में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने जांच व गवाहियों पर कई सवाल उठाए।

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Image Source : ANI इलाहाबाद हाई कोर्ट।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक शख्स को 23 साल जेल में रहने के बाद पत्नी और 3 बच्चों की हत्या के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की गलती साबित नहीं कर सका। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की 2 जजों की बेंच ने 16 फरवरी को दिए फैसले में इस मामले को 'हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था पर एक दुखद टिप्पणी' बताया। कोर्ट ने कहा कि इस पर गंभीर सोच-विचार की जरूरत है।  बेंच ने कहा, 'वास्तविक सुधार के उपाय जैसे जजों की संख्या बढ़ाना, उनके सहायक स्टाफ बढ़ाना और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देना इस समय बहुत जरूरी है। सिर्फ सम्मेलन और बैठकें करने से स्थिति कभी नहीं सुधरेगी।'

'असली कष्ट रिहाई के बाद होगा'

कोर्ट ने आरोपी रईस को बरी करते हुए कहा, 'हालांकि वह अब रिहा हो रहा है, लेकिन उसकी असली सजा अभी खत्म नहीं हुई है। रिहाई के बाद उसका असली कष्ट शुरू होगा। उसके माता-पिता और भाई-बहन शायद अब जीवित न हों। उसकी पत्नी और 3 बच्चे पहले ही मर चुके हैं। अब 25-26 साल का हो चुका उसका बेटा अजीम अपने पिता का घर में स्वागत करेगा, यह भी तय नहीं है।' पुलिस के मुताबिक, 29-30 अगस्त 2003 की रात को घरेलू झगड़े के बाद रईस ने चाकू से अपनी पत्नी और 3 बच्चों के गले काट दिए थे। मृतक महिला के चाचा ने इसकी रिपोर्ट लिखाई थी जिसके बाद निचली अदालत ने रईस को 4 हत्याओं का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 

बेटे ने अदालत से कही थी ये बात

निजली अदालत के फैसले के खिलाफ रईस ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने पूरे सबूतों की जांच की। इस मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह आरोपी का बेटा अजीम था जो उस समय सिर्फ 5 साल का था। क्रॉस-एग्जामिनेशन में बच्चे ने माना कि उसने रिपोर्ट लिखाने वाले चाचा और सरकारी वकील के कहने पर पढ़ी-लिखी बातें कही थीं। उसने यह भी कहा कि अगर वह वैसा बयान न देता तो चाचा उसे घर से निकाल देते। कोर्ट ने यह भी देखा कि रिपोर्ट लिखाने वाले चाचा और रईस के बीच जमीन का पुराना झगड़ा था और इससे चाचा के मकसद पर शक हुआ।

चाकू को लेकर भी गहराया था शक

इसके अलावा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ लिखा था कि गले पर घाव काटने वाले किसी भारी हथियार से हुए थे, जिनसे गले लगभग अलग हो गए थे। लेकिन पुलिस ने जो चाकू बरामद किया था, वह साधारण चाकू था। कोर्ट ने कहा कि यह सबूत आरोपों से पूरी तरह मेल नहीं खाता।  कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा, 'मां और तीन बच्चों की यह बहुत क्रूर और भयानक हत्या थी, लेकिन अभियोजन पक्ष के सबूत यह साबित नहीं कर सके कि यह अपराध आरोपी रईस ने ही किया।' इसलिए कोर्ट ने रईस को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए।

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