कानपुर: यूपी के कानपुर में उस महिला को बेल मिल गई है जिसे पुलिस ''4 शादी करने वाली लुटेरी दुल्हन'' बता रही थी। कानपुर पुलिस की तरफ से मामले में गंभीर धाराएं लगाने के बाद कोर्ट में सबूत ना पेश करने की वजह से चर्चित कथित ‘'लुटेरी दुल्हन'’ दिव्यांशी चौधरी को रिहाई मिल गई। वहीं, दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकीलों ने मामले में दमदार और ठोस सबूत पेश करके दिव्यांशी की रिहाई का रास्ता साफ किया। कानपुर की एसीजेएम कोर्ट ने पुलिस की 8 दिन की रिमांड की मांग को सिरे से खारिज करते हुए दिव्यांशी को पर्सनल बॉन्ड पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस रिमांड के लिए कोई ठोस सबूत या विश्वसनीय सामग्री पेश नहीं कर सकी, जिसके बाद अब मामले में जल्दबाजी दिखाने को लेकर पुलिस की किरकिरी हो रही है।
दिव्यांशी चौधरी का पति पर पलटवार
एसीजेएम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल “आरोपों और अनुमानों” के आधार पर किसी आरोपी को पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जा सकता। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की रिमांड अर्जी को “आधारहीन” करार देते हुए खारिज कर दी। इस बेल के ग्रांट होने के बाद दिव्यांशी चौधरी भी मीडिया के सामने आईं। इस दौरान उन्होंने अपने पति आदित्य पर आरोप लगाया कि वह जिस थाने में तैनात था, उसने उसी में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करावाया है। दिव्यांशी ने अपने आपको बेगुनाह बताते हुए मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी 4 शादियां नहीं हुई हैं। उनपर लगाए गए सारे आरोप निराधार हैं।
पुलिस ने दिव्यांशी पर क्या आरोप लगाए?
कानपुर पुलिस ने दिव्यांशी चौधरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कुल 12 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था, जिनमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी, विश्वासघात और जबरन वसूली जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। पुलिस ने कोर्ट से 8 धाराओं के तहत रिमांड मांगी थी ताकि कथित गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके, लेकिन बचाव पक्ष के मजबूत तर्कों के आगे पुलिस की दलीलें कमजोर साबित हुईं।
दिव्यांशी के वकीलों ने कोर्ट में क्या दलील दी?
दिव्यांशी की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश भसीन, एडवोकेट वरुण भसीन, विप्लव अवस्थी और शुभम पांडे ने कोर्ट को बताया कि पुलिस के पास न तो कोई तकनीकी साक्ष्य है और न ही कोई ऐसा दस्तावेज जो रिमांड को उचित ठहरा सके। कोर्ट ने बचाव पक्ष के तर्कों से सहमति जताते हुए रिमांड अर्जी खारिज कर दी और आरोपी को रिहा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने साथ ही दिव्यांशी को चेतावनी दी कि जांच में पूरा सहयोग करें और किसी भी गवाह पर दबाव न डालें।
पुलिस के इस पैंतरे पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
वहीं, इस मामले में दिव्यांशी चौधरी के वकील ने पुलिस पर अदालत में यह भी आरोप लगाया कि पुलिस दिव्यांशी को दिन में लगभग 12 बजे गिरफ्तार कर चुकी थी, लेकिन रिमांड के लिए आवेदन दाखिल करने की प्रक्रिया शाम 5:30 बजे के बाद शुरू हुई। उन्होंने कहा कि पुलिस देर शाम रिमांड लेने के लिए घर पहुंची, लेकिन इस दौरान अदालत की कार्य करने की समय-सीमा पार हो चुकी थी। ऐसे में संबंधित जज ने शाम को रिमांड सुनने से यह कहते हुए मना कर दिया कि प्रक्रिया रात में पूरी नहीं की जा सकती, इसलिए सुबह आएं। अदालत ने इस पर भी नाराजगी जताई। वकील के अनुसार, कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस देर रात सिर्फ इस उम्मीद में पहुंची थी कि 'बिना फाइल पढ़े' रिमांड मिल जाएगी, लेकिन पुलिस का दांव उल्टा पड़ गया और दिव्यांशी को रिहा कर दिया गया।
पुलिस ने दिव्यांशी को बताया संगठित गिरोह का मेंबर
दिव्यांशी चौधरी पर आरोप है कि वह एक संगठित गिरोह की सक्रिय सदस्य थी जो शादी का झांसा देकर अमीर लोगों को अपना शिकार बनाता था। शादी के बाद फर्जी बलात्कार का केस दर्ज करवाकर और अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर लाखों रुपये वसूले जाते थे। पुलिस इसे “फेक रेप-एक्सटॉर्शन रैकेट” का नाम दे रही है। गिरफ्तारी के बाद से ही यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पुलिस के सामने चुनौती बढ़ गई है कि वह ठोस सबूतों के साथ दोबारा रिमांड के लिए आवेदन करे या चार्जशीट दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़े।
(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)
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