कानपुर: यूपी के कानपुर में 8 फरवरी 2026 को हुई चर्चित लेम्बोर्गिनी हिट एंड रन घटना ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। बुधवार (11 फरवरी 2026) को कोर्ट में बड़ा यू-टर्न आया, लेकिन अदालत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा की लग्जरी कार लेम्बोर्गिनी रिवोल्टो ने VIP रोड पर तेज रफ्तार में कई वाहनों और पैदल राहगीरों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में कम से कम 6 लोग के घायल होने की खबर सामने आई, जिनमें कथित तौर पर घटना होने के बाद कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी, वायरल वीडियो और CCTV फुटेज में कार की बेकाबू ड्राइविंग साफ नजर आई, जिसने पूरे शहर में आक्रोश पैदा कर दिया।
पुलिस जांच में शुरुआत से ही शिवम मिश्रा को ही ड्राइवर माना गया। लेकिन पहले FIR अज्ञात के खिलाफ गाड़ी नम्बर पर दर्ज हुई थी । जिसके बाद ग्वालटोली थाने की रिपोर्ट, CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और हादसे के तुरंत बाद के वीडियो में बाउंसर द्वारा शिवम को ड्राइविंग सीट से निकालते दिखना, ये सभी सबूत पुलिस के दावे को मजबूत करते हैं। शुरुआत में FIR में "अज्ञात चालक" का नाम था, लेकिन जनाक्रोश और सबूतों के आधार पर 9 फरवरी को शिवम मिश्रा का नाम आरोपी के रूप में जोड़ा गया। पुलिस कमिश्नर ने भी स्पष्ट कहा कि जांच में कोई दूसरा ड्राइवर मौजूद नहीं पाया गया और शिवम ही कार चला रहा था।
मामले में नया ट्विस्ट तब आया जब मंगलवार को कारोबारी केके मिश्रा थाने पहुंचे और दावा किया कि हादसे के समय उनका बेटा शिवम नहीं, बल्कि परिवार का ड्राइवर मोहन कार चला रहा था। उन्होंने कहा कि शिवम को दौरा पड़ गया था, कार लॉक हो गई और तबीयत बिगड़ने के कारण शिवम को दूसरी गाड़ी में ले जाया गया। बुधवार को मोहन खुद वकील के साथ कोर्ट पहुंचा। उसने सरेंडर करते हुए कोर्ट में कहा, "मैं ही गाड़ी चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ा, मैं घबरा गया और हादसा हो गया। मैं नीचे से निकला, बाउंसर ने शिवम को निकाला।" मोहन ने हलफनामा भी पेश किया और जमानत की मांग की।
इतना ही नही कोर्ट में थोड़ी देर बाद एक और ट्वीस्ट ने मामले को और रोचक बना दिया जब शिवम के वकील ने कोर्ट परिसर में दावा किया कि घटना में घायल वादी मोहम्मद तौसीफ ने भी इस मामले में समझौता कर लिया और कहा कि अब वो कोई आगे कार्रवाई नहीं चाहता। इतना ही नहीं, उन्होंने मोहन को ही ड्राइवर बताया, जिसने कुछ समय पहले शिवम की पहचान की थी वो आज कोर्ट में मुकर गया।
फिलहाल ये दावा शिवम के अधिवक्ता द्वारा किया गया जिसकी ऑफिशियल कोई पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में बचाव पक्ष ने लेम्बोर्गिनी कार को रिलीज कराने की भी अर्जी दी। लेकिन कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट का गंभीरता से संज्ञान लिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पुलिस जांच और विवेचना में आरोपी शिवम मिश्रा ही है, मोहन का नाम कहीं नहीं आया। इसलिए मोहन को आरोपी नहीं माना जा सकता और उसकी सरेंडर अर्जी खारिज कर दी गई। कोर्ट ने कार रिलीज पर पुलिस से टेक्निकल रिपोर्ट भी तलब की है। जब्त लेम्बोर्गिनी अभी भी पुलिस कस्टडी में रहेगी।
यह फैसला बचाव पक्ष के लिए बड़ा झटका है। पुलिस का कहना है कि CCTV और अन्य सबूतों से साफ है कि कार में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं था। नए वीडियो में भी हादसे के बाद शिवम अकेले ड्राइविंग सीट पर फंसे दिखे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसे "फर्जी ड्राइवर" या "कवच" बनाने की कोशिश करार दिया जा रहा है। पुलिस जांच जारी है और शिवम मिश्रा अब तक मुख्य आरोपी बने हुए हैं। (इनपुट: कानपुर से अनुराग श्रीवास्तव)
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