उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस पर ब्लैक आउट मॉक ड्रिल की गई। इस दौरान 10 मिनट के लिए सभी जिलों में लाइटें बंद रहीं और पूरी तरह से ब्लैकआउट रहा। मॉक ड्रिल के दौरान बम फटे और आग लगी। इसके बाद वॉलंटियर्स ने लोगों के रेस्क्यू किया।
मॉक ड्रिल के दौरान देखा जाता है कि हवाई हमले के लिए प्रशासन और आम लोग कितने तैयार हैं। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरे देश में कई मॉक ड्रिल की गई थीं। इसके बाद से ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल का सिलसिला जारी है। मॉक ड्रिल में यह देखा जाता है कि इमरजेंसी में दुश्मन देश के हमले से निपटने के लिए हम कितना तैयार हैं।
मॉक ड्रिल में क्या-क्या हुआ?
ब्लैक आउट मॉक ड्रिल का हुआ आयोजन।
मॉक ड्रिल के दौरान फटे बम, लगी आग
फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर पाया काबू।
सिविल डिफेंस टीम ने घरों में फंसे घायल लोगों को निकाला बाहर।
NCC व स्काउट गाइड के कैडेट भी बचाव कार्य मे हुए शामिल।
एम्बुलेंस के माध्यम से घायलों को भेजा गया अस्पताल।
10 मिनट तक पूरे इलाके में रहा ब्लैक ऑउट।
कॉलेज परिसर में युद्ध जैसा दिखा माहौल।
शहर के GIC कॉलेज में किया गया आयोजन।
प्रमुख सचिव नागरिक सुरक्षा के आदेश पर किया गया मॉक ड्रिल।
डीएम और एसपी समेत प्रशासनिक अधिकारी रहे मौजूद।
सभी जिलों में दिए गए थे आदेश
यूपी सरकार के अधिकारियों ने बताया कि 23 जनवरी 2026 को प्रदेश के सभी जिलों में ब्लैक आउट मॉक ड्रिल आयोजित किए जाने के आदेश दिए गए थे। ब्लैक आउट का आशय हवाई हमले या किसी आपात स्थिति के दौरान क्षेत्र के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, आवासों, सड़कों तथा आम जनता को सुरक्षित रखने के लिए विद्युत आपूर्ति बंद कर प्रकाश प्रतिबंध लागू करना होता है। इसी क्रम में 23 जनवरी 2026 को शाम 6 बजे से 6 बजे तक राजकीय इंटर कॉलेज परिसर, एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में ब्लैक आउट एक्सरसाइज आयोजित की गई।
लोगों से प्रशासन की अपील
ब्लैक आउट के दौरान आपातकालीन बचाव से संबंधित विधियों का अभ्यास और प्रदर्शन भी किया गया। अधिकारियों ने आसपास के समस्त प्रतिष्ठानों, चेंबरों, कार्यालयों और क्षेत्र की जनता से निर्धारित समय के दौरान अपने घरों और प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद रखने की अपील की थी, ताकि बाहर किसी प्रकार की रोशनी दिखाई न दे। साथ ही लोगों से अनुरोध किया गया कि वे अपने घरों में ही रहें, बाहर माचिस, लाइट या टार्च का प्रयोग न करें और सावधानीपूर्वक चलें, भागदौड़ न करें। इस दौरान धूम्रपान करने से भी मना किया गया है। एडीएम ने स्पष्ट किया कि यह ब्लैक आउट पूरी तरह एक मॉक ड्रिल है, जिसे सिविल डिफेंस के वार्डनों की सहायता से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनमानस को भविष्य में हवाई हमले, युद्ध या अन्य विषम परिस्थितियों में होने वाले ब्लैक आउट के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे इस अभ्यास में सहयोग करें और इसे गंभीरता से लें।
दोपहर में ही मॉकड्रिल स्थल पर पहुंचे वार्डन
मॉक ड्रिल में सिविल डिफेंस के जिन वार्डन की सक्रिय रूप से ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें दोपहर में ही मॉक ड्रिल स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। सभी वार्डन मॉक ड्रिल स्थल पर मौजूद हैं और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सभी वार्डन के लिए शाम 4:30 बजे तक मॉक ड्रिल स्थल पर पहुंचना जरूरी है। इसके बाद सभी के साथ ब्रीफिंग कर समन्वय तय किया जाएगा और मॉक ड्रिल पूरी की जाएगी।
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