पीलीभीत: पीलीभीत टाइगर रिजर्व से होते हुए पीलीभीत के माधवटांडा से खटीमा उत्तराखंड जाने वाली सड़क पर टहलते हुए एक भालू का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बाघ और तेंदुए के बाद अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व में घूमने वाले भालू भी चर्चा का विषय है और लोग इस वीडियो पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं।
खूबसूरती के लिए मशहूर है पीलीभीत टाइगर रिजर्व
दरअसल, पीलीभीत टाइगर रिजर्व अपने बाघों की खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इसके चलते यहां हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक बाघों का दीदार करने के लिए आते हैं। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 73 से अधिक बाघ 80 से अधिक तेंदुए और खूबसूरत पक्षियों की 400 से भी अधिक प्रजातियां हैं। इसके साथ ही यहां तीन प्रजातियों के हिरन और भालू भी बड़ी संख्या में है। शाम होते ही जब सड़कों पर आवागमन कम होता है वैसे ही यह जानवर सड़कों पर निकल आते हैं और यह नजारा यहां से गुजरने वाले लोगों को रोमांचित कर देता है।
भालू का वीडियो बनाकर लोगों ने किया वायरल
हाल ही में पीलीभीत के माधवटांडा कस्बे से खटीमा उत्तराखंड जाने वाली सड़क पर जंगल के अंदर टहलते हुए एक भालू का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जो यहां से गुजर रहे किसी राहगीर ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
घटनास्थल के तीसरे दिन दिखे बाघ के पद चिन्ह
पीलीभीत के हजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शांति नगर गांव की रहने वाली रेशमा देवी को घर के अंदर से खींच कर अपना निवाला बनाने वाले बाघ की मॉनीटरिंग कर रही वन विभाग की टीम को घटना के तीसरे दिन शुक्रवार को घटनास्थल से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर कबीरगंज संपूर्ण नगर मार्ग के पास बाघ के पदचिन्ह देखने को मिले हैं। इससे बाघ के आसपास होने की आशंका और बढ़ गई है। जिसके चलते लखीमपुर की संपूर्ण नगर रेंज की वन विभाग की टीम बाघ के ट्रेंकुलाइज की तैयारी में जुट गई है।
दरअसल बीते 3 जून को हजार थाना क्षेत्र के शांति नगर निवासी रेशमा देवी अपने घर में नल पर बर्तन धो रही थी। तभी जंगल से निकाल कर आए बाघ ने उन पर हमला कर दिया और जंगल में खींच ले गया। ग्रामीणों ने घटना की सूचना वन विभाग के अधिकारियों के दी जिसके बाद संपूर्ण नगर रेंज के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे साथ ही सूचना मिलने पर लखीमपुर के डीएफओ ने घटनास्थल पहुंचकर घटना की जानकारी जुटाई।
रिपोर्ट- कुलदीप कल्प, पीलीभीत
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