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Ramadan 2026: भारत में रमजान का चांद का हुआ दीदार, गुरुवार को रखा जाएगा पहला रोजा, जानें नियम

Written By: Vineeta Mandal Published : Feb 18, 2026 07:29 pm IST, Updated : Feb 18, 2026 07:53 pm IST

Ramadan 2026 in India: भारत में भी रमजान का चांद नजर आ गया है। इसी के साथ पाक महीना रमजान की शुरुआत हो गई है। मुस्लिमों के लिए इस माह का विशेष महत्व होता है।

रमजान 2026- India TV Hindi
Image Source : PEXELS रमजान 2026

Ramadan 2026: आज यानी कि बुधवार को रमजान का चांद दिख गया है। इसी के साथ पाक महीना रमजान की शुरुआत हो गई है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, माह-ए रमजान में रोजा रखने से अल्लाह खुश होते हैं और सभी दुआएं कुबूल होती है। इस पाक महीने में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए खुशी का पल होता है।  इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान के महीने में अल्लाह से पैगंबर मोहम्मद साहब को कुरान की आयतें मिली थीं, इसलिए मुसलमानों के लिए यह महीना बहुत ही पाक माना जाता है। 

लखनऊ ईदगाह इमाम, मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, मून कमेटी की तरफ से ऐलान किया गया है कि आज देश के अलग-अलग हिस्सों में चांद दिख गया है। इसके आधार पर यह ऐलान किया जाता है कि कल, 19 फरवरी, 2026 को पहला रोजा होगा। नमाज़ सिर्फ मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए। सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जानी चाहिए। मैं सभी से अपील करता हूं कि नमाज सिर्फ मस्जिद के अंदर ही पढ़ें।'

रमजान का महत्व

हर मुसलमान पूरे साल माह-ए रमजान का इंतजार करते हैं। कहा जाता है कि रमजान के दौरान की गई इबादत का अन्य महीने के मुकाबले कई गुना अधिक फल मिलता है। रमजान के दौरान रोजा रखना हर मुसलमान के लिए फर्ज माना जाता हैं। इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने रमजान को मुस्लिम धर्म में अत्यधिक पवित्र माना गया है। इस पवित्र महीने की शुरुआत चांद देखने के बाद से होती है। रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है।  रमजान में मुस्लिम रोजा रखते हैं और तरावीह की नमाज और कुरआन शरीफ पढ़ते हैं।  रमजान में जकात का भी विशेष महत्व होता है। जकात का अर्थ है अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों में बांटना। जकात इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक बताया गया है। रमजान में रोजा-नमाज और कुरआन की तिलावत के साथ जकात और फितरा देने का भी खास महत्व है। रमजान के आखिरी दिन ईद मनाई जाती है, जो कि मुसलमानों का सबसे बड़ा त्यौहार होता है।

रोजा का नियम

इस्लाम में बताया गया है कि रोजा रखने से अल्लाह खुश होते हैं और सभी दुआएं कुबूल होती है। रोजे के दौरान पूरे दिन बिना अन्न और जल के रहना पड़ता है। इतना ही नहीं रोजा रखने वाले को और भी कई बातों का ध्यान रखना पड़ा है। जैसे- रोजा में बुरा देखना, सुनना और बोलने से बचना चाहिए। इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आपके द्वारा बोली गई बातों से किसी की भावनाएं आहत न हो। रोजा सूरज ढलने के बाद शाम के वक्त ही इफ्तार के दौरान खोला जाता है और फिर सहरी खा कर रोजा रखा जाता है। सूरज निकलने से पहले खाए गए खाने को सहरी कहते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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