Wednesday, February 18, 2026
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ब्रेन हेमरेज कब होता है, एक्सपर्ट से जानें उसके कारण और क्या हैं बचाव के उपाय?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam Published : Feb 18, 2026 08:57 pm IST, Updated : Feb 18, 2026 08:57 pm IST

ब्रेन हेमरेज तब होता है जब दिमाग के अंदर की कोई नस फट जाती है, जिससे आसपास के टिशूज़ में खून भर जाता है। चलिए जानते हैं इसके कारण और बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

ब्रेन हेमरेज - India TV Hindi
Image Source : FREEPIK ब्रेन हेमरेज

ब्रेन हेमरेज मस्तिष्क में रक्तस्राव की एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है। इसमें दिमाग की किसी रक्त वाहिका के फटने से खून आसपास के ऊतकों में फैल जाता है। यह स्थिति अचानक हो सकती है और तुरंत इलाज न मिलने पर दिमागी क्षति या मृत्यु का कारण बन सकती है। हाल ही में सलीम खान को भी हल्का ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिसके ट्रीटमेंट के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई गई। डॉक्टरों की टीम ने डीएसए (DSA - डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी) नामक एक बेसिक मेडिकल टेस्ट और प्रोसीजर किया, जो सफल रहा। ऐसे में हमने पीएसआरआई अस्पताल में कंसल्टेंट और न्यूरोलॉजी डॉक्टर भास्कर शुक्ला से बात की और उन्होंने बताया कि ब्रेन हेमरेज कब होता है, उसके कारण क्या हैं और बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होती है यह समस्या

आमतौर पर यह समस्या 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती है, लेकिन आजकल अनियमित जीवनशैली के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ब्रेन हेमरेज को व्यापक रूप से स्ट्रोक की एक श्रेणी माना जाता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में Hemorrhagic Stroke कहा जाता है।

कब होती है ब्रेन हेमरेज की शुरूआत?

जब किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बहुत अधिक रहता है, तो दिमाग की नाजुक रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ जाता है और वे फट सकती हैं। सिर पर गंभीर चोट लगना, सड़क दुर्घटना या गिरना भी इसका बड़ा कारण हो सकता है। इसके अलावा, दिमाग की नसों में कमजोरी या गुब्बारे जैसी सूजन, जिसे Cerebral Aneurysm कहा जाता है, फटने पर अचानक रक्तस्राव कर सकती है। कुछ मामलों में ब्लड थिनर दवाओं का अधिक उपयोग या रक्त संबंधी विकार भी जोखिम बढ़ा देते हैं।

क्या हैं लक्षण?

इसके लक्षण अचानक और तेज हो सकते हैं, जैसे भयंकर सिरदर्द, उल्टी, शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, चक्कर आना या बेहोशी। ऐसे किसी भी संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत नजदीकी अस्पताल में आपातकालीन उपचार लेना चाहिए।

क्या हैं बचाव के उपाय?

बचाव के लिए सबसे जरूरी है ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना। नियमित जांच, संतुलित आहार, नमक का सीमित सेवन, धूम्रपान और शराब से दूरी, नियमित व्यायाम और तनाव नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि परिवार में स्ट्रोक या नसों की बीमारी का इतिहास है तो समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना आवश्यक है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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